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शिवसेना का ऐलान, अपने दम पर लड़ेगी आगामी चुनाव

– राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में फैसला
– उद्धव ने फिर संभाली कमान, आदित्य को मिली नई जिम्मेदारी
– सीएम ने कहा नो टेंशन
मुंबई- उद्धव ठाकरे को फिर से शिवसेना पक्षप्रुमख के पद पर ताजपोशी की गई है। युवा सेना के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे को पदोन्नति देकर राष्ट्रीय संगठन में नेता पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिवसेना ने अपनी सहयोगी भाजपा को निशाने पर लेते हुए एेलान किया है आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव वह अपने दम पर लडे़गी। साथ ही शिवसेना ने देश के सभी राज्यों में होनेवाले चुनाव में पार्टी अपने उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है। इधर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य सरकार को कोई खतरा नहीं है। राज्य सरकार अपना 5 साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करेगी। भाजपा ने पलटवार किया है कि हम भी अपने बल पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

शिवसेना प्रमुख दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मंगलवार को वर्ली के सरदार वल्लभ भाई पटेल इंडोर स्टेडियम में आयोजित शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। उद्वव साफ कर दिया है कि शिवसेना एनडीए गठबंधन से अलग हो जाएगी। वर्ष 2019 में होनेवाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने का प्रस्ताव पार्टी सांसद संजय राऊत ने पेश किया था ,जिसे बैठक में मौजूद नेताओं ने हाथ उठाकर सहमति दर्शाई। बैठक में उद्धव की नई टीम की घोषणा की गई। नेता पद के लिए पांच नए चेहरे शामिल किए गए है। इनमें आदित्य ठाकरे, अनंत गीते, चंद्रकांत खैरे, आनंदराव अडसूल और एकनाथ शिंदे का समावेश है। संगठन में कुल 13 नेता होंगे। जिनमें मनोहर जोशी, सुभाष देसाई, लीलाधर ढाके, दिवाकर रावते, संजय राऊत, रामदास कदम, सुधीर जोशी, गजानन कीर्तिकर का समावेश है।

नार्वेकर को भी जिम्मेदारी
उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी मानेजानेवाले मिलिंद नार्वेकर को संगठन के सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सूरज चव्हाण को भी नई कार्यकारिणी में शामिल कर उन्हें सचिव पद की जवाबदारी सौंपी गई है। अरविंद सावंत, नीलम गोऱ्हे, मनिषा कायंदे, अमोल कोल्हे और अनिल परब पार्टी प्रवक्ता नियुक्त किए गए हैं।

भाजपा पर बरसे उद्धव
अपने अध्यक्षीय भाषण में उद्धव ने भाजपा पर जमकर हमला बोला। उद्धव ने पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को आडे़ हाथों लेते हुए कहा कि इज़राइल के प्रधानमंत्री के साथ अहमदाबाद में पतंग उड़ाने से बेहतर होता कि श्रीनगर के लालचौक पर तिरंगा फहराते तो हमें पीएम मोदी पर गर्व होता। पीएम श्रीनगर में रोड शो क्यों नहीं करते। केवल 56 इंच छाती होने का कोई मतलब नहीं होता, उसके लिए सीने में साहस भी होना चाहिए। यदि सरदार वल्लभ भाई पटेल होते तो , वे कश्मीर,पाकिस्तान , बांगलादेश का समस्या ही खत्म कर देते। उद्धव ने कहा कि गाय मारना पाप है, उसी तरह झूठ बोलना भी पाप है। भाजपा झूठ बोलकर सत्ता में आई है।

..तो भाजपा हार जाती चुनाव
उद्धव ने कहा कि यदि गुजरात में क्षेत्रीय पार्टी होती तो वहां की जनता भाजपा-कांग्रेस के बजाए क्षेत्रीय पार्टी को पसंद करती। भाजपा चुनाव हार जाती। गुजरात विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी को पाकिस्तान के नाम का सहारा लेना पड़ा, जिसपर पाक ने भी आपत्ति जताई थी।

गडकरी पर कसे तंज
उद्धव ने गडकरी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने समुद्र में तैरते होटल को अनुमति न देने पर सीमा पर जाकर काम करने की बात कही थी। उद्धव ने कहा कि यह बातें बंद कमरे में हो सकती थी। भले ही भाजपा की सरकार हो लेकिन सीमा पर जाकर सेना के जवान ही दुश्मनों से लोहा लेते हैं। उन्होंने कहा कि गड़करी मुंबई आए और नेवी का अपमान कर गए।नेवी सीमा पर हमारी सुरक्षा करती है। वास्तव में सेना के जवानों का ही 56 इंच का सीना है.

तोड़ देंगे अदृश्य हाथ
इस दैरान उद्धव ने आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव स्वयंबल पर लड़ने की अधिकृत घोषणा की। उन्होंने कहा कि हिंदू वोटों में बंटवारा न हो इसलिए शिवसेना अन्य राज्यों में अपने उम्मीदवार उतारने में कतराती थी। आगे देश के सभी राज्यों में होनेवाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव पार्टी अपने दम पर लड़ेगी। कोरेगांव-भीमा प्रकरण का उल्लेख करते हुए उद्धव ने कहा कि इस हिंसा के पीछे अदृश्य हाथ था। इस अदृश्य हाथ को तोड़े बिगर शिवसेना शांत नहीं बैठेगी।

हम भी तैयार
भाजपा के मुंबई अध्यक्ष आशिष शेलार ने कहा है कि हम शिवसेना से चुनावी गठजोड़ करने के पक्ष में थे। यदि शिवसेना एकला चलो की भाषा बोल रही है तो भाजपा भी अपने दम पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। अकेले चुनाव लड़ने पर शिवसेना को ही नुकसान होगा। भाजपा समर्थक सांसद संजय काकडे ने कहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के 28 तो शिवसेना के केवल 5 सांसद चुने जाएंगे। इसीतरह विधानसभा चुनाव में भाजपा के 165 उम्मीदवार जीत हासिल करेंगे। अकेले चुनाव लड़ने पर शिवसेना बढ़ने क बजाए उसका नुकसान होगा। मोदी लहर के कारण शिवसेना के उम्मीदवार जीते थे। काकडे ने ताना मारा कि शिवसेना सत्ता के मोह में उलझी हुई है।

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