फसल के मौसम से ठीक पहले, मक्का किसानों को प्रशिक्षित किया

लखनऊ। बसंत के मौसम से पहले अपने किसान संलग्नता अभियान, ‘मार्गदर्शक’ के तहत सतत कृषि कंपनी, मोन्सेंटों इंडिया ने उत्तरप्रदेश में मक्का उगाने वाले जिलों के 1300 से अधिक प्रगतिशील किसानों को चुना है। वर्तमान में कंपनी उन्हें खेती की प्रभावशाली विधियों तथा हाईब्रिड बीजों के सही चुनाव पर शिक्षित कर रही है।

उत्तरप्रदेश में मक्का उगाने वाले प्रमुख जिले कन्नौज, फर्रुखाबाद, कानपुर नगर, कानपुर देहात, अलीगंज, एटा, शिकोहाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, बदायूं, संभल, हरदोई, बिल्सी, इटावा, शाहजहांपुर और कैमगंज हैं। ‘मार्गदर्शक’ मोन्सेंटों का एक शिक्षण कार्यक्रम है, जिसके तहत फसल के मौसम से ठीक पहले, कंपनी से कृषि विशेषज्ञ राज्य के हर जिले से चयनित प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। एक व्यक्ति से दूसरे को प्रशिक्षित करने का एक श्रेष्ठ उदाहरण स्थापित करते हुए ‘मार्गदर्शक’ जानकारी साझा करके किसान मित्रों को अपने-अपने गांवों में खेती की सर्वश्रेष्ठ विधियों के बारे में बताते हैं।
हरदोई जिले में सेलापुर गांव के किसान, राम शरण वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। अपने साथी मक्का किसानों के बारे में उन्होंने बताया, ‘‘उत्तरप्रदेश में ज्यादातर किसान हाईब्रिड बीजों का उपयोग करते हैं। यद्यपि जानकारी के अभाव में वो हाईब्रिड बीजों का पूरा फायदा नहीं उठा पाते।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘प्रशिक्षण के बाद हम ‘मार्गदर्शक’ के रूप में अपने साथियों के बीच जाएंगे और उन्हें जमीन के चयन, खेत की तैयारी, बुआई की विधियों, खाद, खरपतवार नियंत्रण, बीमारी व कीट प्रबंधन तथा फसल की कटाई जैसे विविध पक्षों पर प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।’’ मोन्सेंटों ने उत्तरप्रदेश में ‘मार्गदर्शक’ कार्यक्रम का प्रारंभ 2012 में किया।

इस अभियान के बारे में मोन्सेंटों के क्षेत्रीय व्यापार प्रबंधक, श्री विनय सिंह ने कहा, ‘‘मक्का उत्तरप्रदेश की प्रमुख फसल है। यहां लगभग 5 लाख किसान मक्का की खेती करते हैं। मक्का की मांग व खेती में जबरदस्त वृद्धि होने के साथ राष्ट्रीय औसत के लिए पैदावार बढ़ाना एक अवसर भी है और एक चुनौती भी। इस बात को ध्यान में रखकर हमारे किसान जागरुकता अभियान – ‘मार्गदर्शक’ के तहत हम किसानों से जुड़कर उनके साथ जानकारी साझा कर रहे हैं, जो वो अपने अन्य साथियों के साथ बांट सकते हैं।’’
उत्तरप्रदेश में बसंत में मक्का का मौसम जनवरी के अंतिम सप्ताह से प्रारंभ होता है और अप्रैल के पहले सप्ताह तक रहता है। बसंत का मौसम किसानों के लिए बहुमूल्य होता है, जब अपनी जमीन को खेती के लिए तैयार करते हैं। इसलिए बुआई से पहले ‘मार्गदर्शक’ कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण उन्हें खेत की विभिन्न समस्याओं का समाधान करके सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करने में मदद करेगा।

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