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संसद में नरेश अग्रवाल के इस सवाल पर क्यो हो गई अरुण जेटली की बोलती बंद…

नई दिल्ली। बुधवार को राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने उठाया कि क्या 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद हो गई है? उन्होंने उपसभापति पी. जे. कुरियन से कहा कि जब परंपरा रही है कि संसद सत्र के दौरान सरकार अगर नीतिगत फैसले लेती है तो सदन को बताया जाता है। ऐसे में इस बात की भी जानकारी देनी चाहिए कि क्या सरकार ने रिजर्व बैंक को 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद करने को कहा है।

सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा, ‘रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के 3.2 लाख करोड़ रुपये छापे। लेकिन अब सरकार ने इनकी छपाई करने से मना कर दिया। नोटबंदी का जो आदेश पहले हुआ, वह रिजर्व बैंक ने नहीं लिया, सरकार ने लिया। रिजर्व बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने मना किया था, तब भी सरकार ने नोटबंदी का फैसला लिया।’ इस पर उपसभापति ने कहा कि यह रिजर्व बैंक का विशेषाधिकार है। दरअसल, उनका कहना था कि नोटबंदी का फैसला सरकार नहीं, रिजर्व बैंक ही ले सकता है।

इस पर कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अगर नोटबंदी का फैसला रिजर्व बैंक का था तो 8 नवंबर 2016 को इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने क्यों की? आजाद ने अग्रवाल के सवाल को बढ़ाते हुए कहा कि आए दिन अखबारों में रोज कुछ न कुछ छपता रहता है कि 1000 रुपये के सिक्के आ रहे हैं। कभी 200 रुपये के तो कभी 500 रुपये के सिक्के आने की बातें होती हैं। हकीकत क्या है, सरकार को बताना चाहिए। आजाद ने पूछा, ‘क्या हमें 1000 रुपये के सिक्के मिलने वाले हैं?’

आजाद के इस सवाल पर उपसभापति ने सदन में मौजूद वित्त मंत्री अरुण जेटली से पूछा कि क्या इन सवालो पर वह अपनी प्रतिक्रिया देना चाहते हैं? इस पर जेटली ने नहीं में जवाब दिया। तब जेडीयू सांसद शरद यादव ने विपक्ष की ओर से मोर्चा संभालते हुए कहा कि सरकार ने 2000 रुपये के नोटों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की तो अफवाहों का बाजार गर्म होगा और लोग नोट लौटाने लगेंगे।

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