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केमिकल अटैक के बाद अब सीरिया पर 8 मिसाइल दागी, कई लोगों की मौत का दावा…

दमिश्क। हमले में 80 लोगों की मौत हो गई थी। अमेरिका ने कहा था कि इसके लिए रूस और ईरान जिम्मेदार हैं। वो इसका बदला लेगा। सीरिया ने दावा किया है कि अमेरिका ने उसके एयरबेस पर सोमवार सुबह 8 मिसाइलें दागीं। अमेरिका ने इन आरोपों से इनकार किया है। इसे शनिवार को यहां किए गए केमिकल अटैक के बाद की कार्रवाई माना जा रहा है।
सीरियाई सेना ने कहा- 8 मिसाइल दागीं सीरियाई के सरकारी टेलीविजन के हवाले से बताया कि सोमवार तड़के होम्स शहर के टर्मिनल 4 एयरफील्ड में जोरदार धमाके सुनाई दिए। टेलीविजन ने सीरिया के एक सैन्य सूत्र के हवाले से कहा कि एयरबेस पर 8 मिसाइल दागी गई हैं। हमले वाले इलाके में बड़ी तादाद में रूसी सैनिक मौजूद हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया कि हमले में कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी तादाद में लोग जख्मी हुए हैं। हताहतों आंकड़ा नहीं बताया गया है।
माना जा रहा है कि यह हमला अमेरिका की ओर से किया गया है।

अमेरिका के रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने कहा कि सीरिया में हवाई हमले में उसका कोई हाथ नहीं है। विपक्ष समर्थक गोता मीडिया सेंटर ने कहा था कि हेलिकॉप्टर से जहरीला नर्व एजेंट सरीन से युक्त बैरल बम गिराया गया। हमले में 75 से ज्यादा लोगों का दम घुट गया, हजारों लोगों को सांस लेने में तकलीफ है। हमले के बारे में सीरिया सरकार और रूस का कहना है कि केमिकल अटैक की खबर झूठी है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि सीरिया में रासायनिक हमला बिना सोचे-समझे किया गया। इसमें कई महिलाओं और बच्चों की मौत हुई। रूस और ईरान सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद को समर्थन देने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्हें इसके लिए बड़ी कीमत चुकानी होगी।

2011 में हुई एक छोटी-सी घटना ने सीरिया में सिविल वॉर का रूप ले लिया। कुछ मुट्ठीभर बच्चों की गिरफ्तारी से शुरू हुआ ये संघर्ष सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद दुनिया के लिए सबसे बड़ी ह्यूमन क्राइसिस बन चुका है। जुलाई 2011 में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए सीरियन आर्मी के अफसरों के एक ग्रुप ने सेना छोड़ फ्री सीरियन आर्मी बनाई।
दिसंबर 2011 से लेकर 2012 तक जगह-जगह सुसाइड बम ब्लास्ट हुए। इसके बाद अल कायदा के लीडर अयमान अल जवाहिरी ने सीरियाई लोगों से जिहाद के लिए आगे आने की अपील की। बीते तीन साल में आईएस ने भी अपने आतंकी भेजने शुरू कर दिए।
2013 में पहली बार सीरिया पर सारिन नाम के जहरीले नर्व एजेंट छोड़ने का आरोप लगा। तब यूएन समेत कुछ देशों ने बराक ओबामा से वहां हमले करने की बात कही थी।
2015 में रूस ने प्रेसिडेंट बशर अल-असद को सपोर्ट कर दिया।

रूस और अमेरिका कहते रहे हैं कि उनका एक ही दुश्मन है- आईएसआईएस। असद के लिए सीरिया डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) को रूस और ईरान सपोर्ट कर रहे हैं। अमेरिका पर आरोप है कि वह असद के खिलाफ विद्रोहियों की मदद कर रहा है। प्रेसिडेंट असद के खिलाफ शुरू हुए हिंसक प्रदर्शनों और संघर्ष में अब तक करीब 4 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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