यूपी में खुलेंगे त्यागे गए नवजातों के लिए ‘पालना’ शिशु केन्द्र

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार माता-पिता व परिवार द्वारा त्यागे व छोड़े गए नवजात शिशुओं के लिए प्रदेश के हर जिले में पालना शिशु केन्द्र स्थापित करेगी। इसके लिए शासन की ओर से सभी मण्डलायुक्तों व जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

इस सम्बन्ध में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार ने आईपीएन को बताया कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत कठिन परिस्थितियों में पाए गये परित्यक्त, नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा के लिए प्रदेश के जिलों में पालना शिशु स्वागत केन्द्र स्थापित किये जायेंगे।

उन्होंने बताया कि इसके लिए उनकी ओर से प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, समस्त मण्डलायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों समस्त जिलाधिकारियों व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों तथा निदेशक महिला कल्याण को परिपत्र भेजे जा चुके है।
उन्होंने बताया कि भेजे गये परिपत्र में कहा गया है कि इन पालना शिशु स्वागत केन्द्रों की स्थापना सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों जिला एवं सिविल अस्पतालों, राजकीय बालगृहों, विशेषीकृत दत्तक ग्रहण इकाइयों तथा चाइल्ड लाइन कार्यालयों में तत्काल स्थापित करने की कार्यवाही की जाये। परिपत्र में कहा गया है कि इन परिपत्रों की स्थापना में सुरक्षा को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाये ताकि कोई भी अज्ञात व्यक्ति, महिला दम्पत्ति जो अपनी पहचान सार्वजनिक न करना चाहता हो नवजात शिशु को पालना केन्द्र में सुरक्षित रख कर वापस जा सके। इन केन्द्रों पर समूह ‘ग’ एवं ‘ख’ के कर्मचारियों की ड्यूटी रोटेशन पर लगाई जायेगी तथा किसी राजपत्रित अधिकारी को इस केन्द्र का प्रभारी बनाया जायेगा।

साथ ही जनपद के मुख्य कार्यालयों में पालना केन्द्र के प्रभारी का नाम व मोबाइल नम्बर डिस्प्ले किया जायेगा और इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया जायेगा। प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी द्वारा इस उद्देश्य से एक हेल्पलाइन नम्बर सुनिश्चित किया जायेगा जोकि 27×7 कार्यरत रहेगा।
उन्होंने बताया कि पालना में नवजात शिशु के मिलने की सूचना तैनात इंचार्ज द्वारा तुरन्त उस जनपद की बाल कल्याण समिति, जिला परिवीक्षा अधिकारी-जिला बाल संरक्षण अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस एवं संबंधित चाइल्ड लाइन, अपने विभागीय अधिकारियों तथा महिला कल्याण विभाग के अधिकारियों को प्रेषित की जायेगी। इसके अतिरिक्त इस केन्द्र में विभिन्न हितधारक विभागों, संगठनों के स्थानीय प्राधिकारियों-प्रतिनिधियों जैसे बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष-सदस्य, स्थानीय पुलिस, किशोर पुलिस इकाई के सदस्य, जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्यों के मोबाइल नम्बर- फोन नम्बर अनिवार्य रूप से रखे जाये, जिससे शिशु के संरक्षण के लिए समन्वित व त्वरित कार्यवाही तत्काल की जा सके।

loading...
Loading...

Check Also

पुलिस ने एलडीए ऑफिस का ताला तोड़ किया कब्जा, साइट ऑफिस में बनाया थाने का कंप्यूटर कक्ष

लखनऊ। एक दिन पहले ही गोमती नगर विस्तार थाने में थाना प्रभारी की पोस्टिंग हुई और …