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आधी रात को खुले सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे, 3 साल बाद दोहराया गया इतिहास…

नई दिल्ली। कर्नाटक में सरकार गठन को लेकर जारी लड़ाई आधी रात को उच्चतम न्यायालय पहुंच गयी और रात के सन्नाटे में ‘राजनीतिक जंग’ जीतने की जद्दोजहद चलती रही। कांग्रेस-जनता दल सेक्यूलर (जद एस) गठबंधन ने रात को शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया और तमाम औपचारिकताओं को पूरा करते हुए सुनवाई मध्य रात्रि के बाद करीब सवा दो बजे शुरू हुई।

कांग्रेस-जद (एस) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मोर्चा संभाला, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों की ओर से पूर्व एटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जिरह की। केंद्र सरकार की ओर से एटर्नी जनरल के के वेणुगोपाल, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और मनिन्दर सिंह पेश हुए। अदालत संख्या-6 में न्यायमूर्ति अर्जन कुमार सिकरी, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण के समक्ष जैसे ही मामले की सुनवाई शुरू हुई, भाजपा विधायकों की ओर से पेश हो रहे रोहतगी ने कहा कि न्यायालय राज्यपाल के आदेश के खिलाफ कोई आदेश पारित नहीं कर सकता। सिंघवी ने दलील दी कि राज्यपाल द्वारा 104 विधायकों वाली भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना 116 सीट जीतने वाले कांग्रेस-जद एस गठबंधन के साथ अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा 104 विधायकों के साथ कतई बहुमत हासिल नहीं कर सकती।

वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के तौर पर बी.एस.येदियुरप्पा के शपथ ग्रह समारोह पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायाधीश ए.के.सीकरी के नेतृत्व वाली पीठ ने कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) की येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक वाली याचिका पर येदियुरप्पा से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति अर्जन कुमार सिकरी, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने रात सवा दो बजे से सुबह साढ़े पांच बजे तक चली सुनवाई के बाद कहा कि वह राज्यपाल के आदेश पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है, इसलिए श्री येदियुरप्पा के शपथ-ग्रहण समारोह पर रोक नहीं लगायेगी। न्यायालय ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि उनका मुख्यमंत्री पद पर बने रहना इस मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। इस मामले में अगली सुनवआई शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे होगी।

गौरतलब है कि राज्यपाल वजुभाई वाला ने भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता दिया था, जिसके खिलाफ कांग्रेस और जेडीएस ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। इस पर न्यायालय ने देर रात सुनवाई शुरू की। राज्यपाल ने येदियुरप्पा को बहुमत सिद्ध करने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। कर्नाटक में 222 सीटों पर चुनाव हुए थे, जिसमें से भाजपा को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीटें मिली थीं।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब आधी रात को अदालत खुला हो। इससे पहले 29 जुलाई 2015 को पहली बार आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खुला था। मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की याचिका, सुप्रीम कोर्ट, गवर्नर और बाद में राष्ट्रपति से खारिज होने के बाद फांसी से ठीक पहले आधी रात को जाने-माने वकील प्रशांत भूषण समेत 12 वकील चीफ जस्टिस के घर पहुंचे थे। उन्होंने याकूब मेमन की फांसी पर रोक लगाने की मांग की। उसके बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस एच एल दत्तू ने वर्तमान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में तीन जजों की बेंच गठित की। देर रात को ही जज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और मामले की सुनवाई शुरू हुई। तीन जजों की इस लार्जर बेंच ने याकूब की फांसी की सजा को बरकरार रखा था।

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