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रक्षाबंधन के दिन बहनें पूजा की थाली में इन चीजों को रखना न भूले

बहनों के लिये यह सबसे खास त्योहार होता हैं और बड़ी ​बेसबरी से इतंजार भी होता हैं इसीलिये ​कुछ चीजे जो पहले से ही तैयार कर लेनी चाहिये…
श्रावण मास की पूर्णमा को भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार रक्षाबंधन मनाया जाता है। यह त्योहार उत्तर भारत में मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए पूर्णिमा का व्रत भी करती हैं।

लेकिन अक्सर लोग इसके पारंपरिक महत्व को नहीं समझते। अमूमन लोग सिर्फ एक थाली लेकर उसे सजाकर उसमें राखी और मिठाइयां रख लेते हैं। जबकि रक्षाबंधन के इस पर्व का संबंध पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है।
जिस प्रकार से हिंदू धर्म में शादी के रस्मों रिवाजों को ध्यान में रखकर हर कार्य किया जाता है। ठीक उसी प्रकार से हर माह के त्योहारों में भी इस बात का खासतौर पर ध्यान रखा जाता है।
तो चलिए अब इसी कड़ी में आगे बताते हैं रक्षाबंधन के समय पूजा की थाली में रखे जाने वाले महत्वपूर्ण सामानों के बारे में…
कुमकुम रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली में जिस सामग्री का सबसे पहले होना अनिवार्य है वह है कुमकुम यानी कि सिंदूर।
इसका संबंध हिंदू धर्म से भई जुड़ा है क्योंकि किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले कुमकुम का ही तिलक लगाया जाता है। यह सलंबी उम्र व विजय का प्रतीक भी माना जाता है।
अक्षत दूसरी सामग्री है अक्षत यानि चावल। हिन्दू धर्म में चावल को अक्षत कहा जाता है और हर शुभ कार्य में इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए भाई के माथे पर विजय का तिलक लगाना चाहिए।
नारियल इसके बाद बारी आती है नारियल की। कुछ जगहों पर रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली में तिलक करने के बाद बहन अपने भाई को नारियल देती है।
इसे श्रीफल भी कहा जाता है, इसे देवी लक्ष्मी का फल भी कहा जाता है। यह भाई की तरक्की के रास्ते खोलता है।
रक्षासूत्र रक्षासूत्र (कलावा या राखी) माना जता है कि रक्षासूत्र बांधने से शरीर संबंधी दोषों से छुटकारा मिलता है। हमारे शरीर में कोई भी बीमारी इन दोषों से ही संबंधित होती है।
मिठाई राखी बांधने के बाद पूजा की थाली में मिठाई भी खिलाने के लिए होनी चाहिए। मान्यता है कि इससे भाई-बहन के रिश्ते में हमेशा मिछास बनी रहती है और कभी भी कड़वाहट नहीं आती।
आरती अन्य सामग्री है दीपक से आरती उतारना। ऐसा कहा जाता है कि राखी बांधने के बाद दीपक जलाकर भाई की आरती उतारने से भाई को बुरी नजर नहीं लगती।

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