उत्तर प्रदेशमथुरा

कुछ वर्षों में तालाब विहीन हो जाएगा कान्हा का ब्रज

हकीकत में मिट रहे, कागजों में खुद रहे तालाब

मथुरा। कुछ वर्षों में कान्हा का ब्रज तालाब विहीन हो जाएगा। शहर ही नहीं गावों से भी तालब पोखर मिट जाएंगे। एक दशक में ब्रज के आधे से ज्यादा तालाब पोखर नष्ट हो चुके हैं।


तालब और पोखरों के नष्ट होने में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का भी बड़ा हाथ है। गांवों के तालाब पोखरों को जाने वाले कच्चे और गहरे रास्तों(दगरा) को सीसी सड़क बनाने के लिए पाट दिया और इन तालाबों तक जाने वाले पानी के रास्ते को बिना सोचे समझे ही खत्म कर दिया। कनेक्टिवटी खत्म हो जाने के बाद ये तालब सूखने लगे और ग्रामीणों ने इन पर कब्जा कर लिया। यह तस्वीर सरकार और जिला प्रशासन की उन तमाम कोशिशों के बाद बन रही है जिसमें लगातार और प्रतिवर्ष गांव से लेकर शहर तक तालाब खोदे जा रहे हैं। कागजों में उन तालाबों का संरक्षण भी हो रहा है जो पहले से मौजूद हैं। ब्रज फउंडेशन और ब्रज विकास ट्रस्ट जैसी कई संस्थाएं तालाबों का संरक्षण कर रही हैं। करोड़ों रुपये इस काम पर खर्च हो रहे हैं। सपा सरकार ने तालाबों को पक्का कराने पर मोटा पैसा बहाया, भाजपा सरकार में इस तरह के कोई प्रयास अभी तक देखने को नहीं मिले हैं। जिला प्रशासन ने ग्राम प्रधानों को इस बात के लिए प्रेरित किया है कि वह तालाब खोदें, अच्छा काम करने वाले प्रधानों को पुरस्कृत किया जाएगा। डीएम को लग रहा है कि ग्राम प्रधान इस पुरस्कार के लिए तालाब खुदवाएंगे।
जिला प्रशासन के प्रयास
बरसात के सीजन से पहले ही डीएम सर्वज्ञराम मिश्र ने गांव-गांव तालाब खुदाई के आदेश ग्राम प्रधानों को दिए है। उन्होंने कहा कि बरसात का जल अनमोल है इधर धरती की कोख से भी जल सूख रहा है। ऐसे में जल का संचयन आवश्यक है। उन्होंने सभी ग्राम प्रधानों से गांव में तालाब खुदाई का कार्य कराए जाने के साथ ही बेहतर कार्य पर पुरस्कार दिए जाने की भी बात कही है।
तहसील दिवस में लगातार पहुंच रहीं शिकायतें, प्रशासन बेसुध
गांवों में तालाबों पर हो रहे कब्जों की जनशिकायतें तहसील दिवसों में बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं। जिन भूमियों पर दशकों से तालाब बने हुए हैं, ग्रामीणों ने लेखपाल और तहसीलदारों से मिली भगत कर उन जमीनों को कागजों में अपने नाम करा लिया है। इसके बाद तालाबों का पाटना शुरू हो जाता है। बड़ी संख्या में ऐसे मामले न्यायालों में विचाराधीन हैं। कोर्ट में मामला विचाराधीन होने की आड़ में तालाब और पोखरों को कब्जाया जा रहा है और प्रशासन आंख मूंद कर बैठा है।
चुनिंदा धार्मिक कुंडों के नाम पर हो रहा भ्रष्टाचार
श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े कुछ कुंडों के संरक्षण के नाम पर पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। इस कवायद में इन कुंडों का भला नहीं हो रहा है। मोटे बजट को ठिकाने लगाने के लिए कुडों को लगातार सिकोड़ा जा रहा है और पक्की चारदीवारी खींच कर संरक्षण का नाम दिया जा रहा है।

पन्ना पोखर पर कब्जे के बाद बदल गई शहर में नालों की दिशा
आधे से अधिक शहर के नालों के पानी को समेटने वाली इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित पन्नपोखर के खत्म हो जाने के बाद शहर के नालों के बहाव की दिशा ही बदल गई है। मथुरा महानगर के आधे नाले उल्टी दिशा में बहने लगे हैं। यही वजह है कि इंडस्ट्रीयल एरिया से लेकर केआर कॉलेज, भूतेश्वर, भैंस बोहरा, डम्पीयर नगर आदि में हल्की बरसात के बाद ही जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
इस लिए खत्म हो रहे तालाब, पोखर
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में वाटर कनेक्टिवटी का टूट जाना, जमीनों की लगातार बढ़ती कीमतें, नगर पाचायत और ग्राम पंचायतों की खुर्दबुर्द हो चुकी जमीन, सरकारी रिकार्ड में गांवों के तमाम तालाब पोखरों का दर्ज नहीं होना, सरकारी कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों का भ्रष्टाचार, गांवों की बढ़ती जनसंख्या और कम होते संसाधन

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