चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 3 माह में सरकारी तेल कंपनियों ने 56.70 लाख टन कच्चा तेल किया आयात

नई दिल्‍ली। भारत सऊदी अरब की बजाय ईरान से ज्‍यादा तेल खरीद रहा है। सऊदी अरब भारत को तेल आयात करने वाले देशों की सूची में दूसरे नंबर पर था लेकिन ईरान ने तेल आयात की आकर्षक वित्‍तीय योजना के जरिए सऊदी अरब को इस मामले में पीछे कर दिया है।

तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में बताया कि ईरान चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की सरकारी तेल कंपनियों को कच्चे तेल का निर्यात करने वाला दूसरा बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है। हालांकि अमेरिका की सख्‍ती के कारण भारत को ईरान से तेल आयात रोकना पड़ सकता है। क्‍योंकि ईरान के खिलाफ इस समय अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं। इससे उसके साथ कोई भी देश कारोबारी गतिविधि नहीं कर सकता।

अमेरिका ने 8 मई 2018 को ईरान के साथ हुए संयुक्त वृहद कार्य योजना वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते से बाहर निकलने की घोषणा की थी इसके साथ ही कच्चे तेल का आयात करने सहित ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों पर फिर से प्रतिबंध लगाने संबंधी आम पूछे जाने वाले कुछ सवाल भी जारी किये थे।

पिछले वित्त वर्ष में सरकारी तेल कंपनियों ने ईरान से आयात होने वाले कच्चे तेल में कटौती की थी। इस साल पहली तिमाही अप्रैल-जून में इन तेल कंपनियों ने ईरान से 56.70 लाख टन कच्चे तेल का आयात किया यह मात्रा सऊदी अरब से अधिक रही। इराक के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने सबसे ज्यादा कच्चा तेल ईरान से खरीदा। धर्मेन्द्र प्रधान ने लोकसभा में कहा कि 2017-18 के दौरान तेल विपणन कंपनियों ने कुल 98 लाख टन कच्चे तेल की खरीदारी की जबकि इससे पिछले साल में इन कंपनियों ने कुल एक करोड़ 30 लाख टन कच्चा तेल आयात किया।

चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 3 माह के दौरान सरकारी तेल कंपनियों ने 56.70 लाख टन कच्चा तेल आयात किया। इसका मूल्य 19,978.46 करोड़ रुपये रहा। ईरान से कच्चे तेल का आयात करने वाली सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में मंगलूर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) शामिल हैं।

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