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संवैधानिक मामलों की वीडियो रिकॉर्डिंग और इसके सीधे प्रसारण की अनुमति देने पर विचार करे : एटर्नी जनरल

नयी दिल्ली। केंद्र सरकार के सर्वोच्च विधि अधिकारी एटर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने उच्चतम न्यायालय को सलाह दी कि वह सभी मुकदमों के सीधे प्रसारण के बजाय फिलहाल केवल संवैधानिक मामलों की वीडियो रिकॉर्डिंग और इसके सीधे प्रसारण की अनुमति देने पर विचार करे।

श्री वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ के समक्ष कहा कि पायलट योजना के तहत संवैधानिक मामलों की न्यायिक कार्रवाई की वीडियो रिकार्डिंग और सीधा प्रसारण सुनिश्चित किया जा सकता है। उसके बाद नतीजों का विश्लेषण करके इसे और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रयोग के तौर पर एक से तीन महीने तक न्यायिक कार्रवाई का सीधा प्रसारण करके यह भी पता लगाया जा सकता है कि यह कितना प्रभावी है।

शीर्ष अदालत ने व्यक्तिगत रूप से जनहित याचिका दायर करने वाली वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह सहित सभी पक्षकारों से कहा कि इस संबंध में वे एटर्नी जनरल को अपने सुझाव दें। एटर्नी जनरल इन सुझावों का संकलन करके उसे न्यायालय में पेश करेंगे। न्यायालय बाद में उसे मंजूरी देगा। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है।

शीर्ष अदालत ने गत 9 जुलाई को कहा था कि न्यायिक कार्रवाई का सीधा प्रसारण अब वक्त की जरूरत है और उसने इस संबंध में सुझाव मांगे थे।  याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व के मामलों का सीधा प्रसारण करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का अधिकार है और संवैधानिक तथा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों का सीधा प्रसारण किया जा सकता है।

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