Wednesday, December 8, 2021 at 3:57 PM

बिहार में कलाकारों को मिलता है सम्मान

बेगुसराय: अमेरिका लंदन या अन्य देशों में सम्मान नहीं मिलता है, उससे कहीं ज्यादा बिहार में कलाकारों को सम्मान दिया जाता है। इसलिए बार-बार बिहार आ कर अच्छा लगता है। ये बातें सरवार अजमेर शरीफ के सूफी गायक साबरी सूफी ब्रदर्स हाजी मो. इकबाल साद ने कहीं। साबरी सूफी ब्रदर्स बुधवार को बेगूसराय एक निजी कार्यक्रम के तहत बेगूसराय आये थे। हरहरमहादेव चौक स्थित एक निजी होटल में हिन्दुतान संवाददाता से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार आना मुझे काफी अच्छा लगता है। यहां के लोग काफी शिक्षित और बुद्धिमान होते हैं। यह प्रदेश बुद्ध भगवान की धरती है। यही से शांति और लोकतंत्र का संदेश पूरे संसार में गया है। साथ ही राष्ट्रकवि दिनकर कि धरती पर आकर भी काफी अच्छा लग रहा है। यहां के लोग सूफी को समझते हैं। पसंद करते और सम्मान भी देते हैं। ये हमारे लिये गौरव की बात है। यहां के लोग कलाकरों का सम्मान करना भी जानते है। उन्होंने कहा कि सूफी एक इबादत का हिस्सा है। आजकल के युथ भी सूफी गायकी को ज्यादा पसंद कर रहे है। सूफी का भारत में 800 सालों से ज्यादा पुराना इतिहास रहा है। हमारी सात पुश्त भी सूफी गायकी ही करती रही। अब यह गायकी पूरी दुनिया में बढ़ रही है। यह पुनरुथान के दौर से गुजर रहा है। इस कला की गरिमा को बनाये रखकर इसकी परमपरा को आगे बनाये रखने में यंग जेनरेशन का बहुत योगदान है। वहीं इनके साथ बगल के जिले मुंगेर से संबंध रखने वाले उपन्यासकार और कवि नीलोत्पल मृणाल भी बेगूसराय पहुँचे। उन्होंने कहा कि अपने घर में कार्यक्रम करके काफी अच्छा लगता है। घर की माटी की खुशबू पाकर खुशी मिलती है। बता दें कि नीलोत्पल मृणाल को उनके उपन्यास डार्क हॉर्स के लिए साहित्य अकादमी के अवार्ड मिल चुका है। इनकी दो और उपन्यास औघड़ और यार जादूगर भी देश की चर्चित उपन्यास में से एक है।