सीओ के नोटिस जारी होते ही राजीवनगरी वासियों में आक्रोश ,जान दे देंगे लेकिन घर पर आंच नहीं आने देंगे

 संघर्ष के लिए पुरूष व महिलाओं की कमिटी गठित ,बैठक में हजारों हुये शामिल

>> अधिग्रहण 1024 एकड़ में सरकार के दो तरह के नीति को लेकर हाईकोर्ट में दाखिल करेंगे जनहित याचिका

>> अधिग्रहण भूमि पर 45 वर्षों से काबिज हैं हजारों परिवार ,बने हैं 8-10 हजार मकान

>> अधिकांश किसानों को आज तक सरकार ने नहीं दिया है मुआवजा , विवाह एवं बीमारी में किसानों ने आम लोगों को किया बिक्री

>> पटना हाईकोर्ट के जजेज एवं स्टाफ क्वार्टर के लिए चिन्हित 20 एकड़ जमीन का प्रस्ताव

पटना ( अ सं ) । राजीवनगर-दीघा में विवादित 1024 एकड़ जमीन को 50 वर्षों में भी किसी सरकार ने निराकरण नहीं किया हालाँकि अधिग्रहण 1024 एकड़ में  600 एकड़ पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की सरकार ने फ्री करने के लिए कैबिनेट से पास कर एक नियमावली जारी किया लेकिन यह भी अधर में रहा । वर्तमान स्थिति पर गौर करें तो अधिग्रहण 1024 एकड़ में करीब 950 एकड़ में हजारों मकान बने हुये हैं और शांतिपूर्ण ढंग से 45 वर्षों से लोग उसपर काबिज हैं ।
     अधिग्रहण के 50 वर्ष बाद पटना सदर के अंचलाधिकारी ने अतिक्रमण वाद चलाने को लेकर आनन-फानन में सार्वजनिक नोटिस जारी किया है और लोगों को अपना पक्ष रखने के लिए  आगामी 23 /5/22 को समय निर्धारित किया हैं और पक्ष नहीं रखने पर एकतरफा कार्रवाई करते हुये पक्का मकान ,पक्का बाउंड्री बाल, झोपड़ी मुक्त करने की बात कहीं हैं ।
     अंचलाधिकारी के अतिक्रमण वाद संख्या 70/21-22 का नोटिस जैसे ही वायरल हुआ लोगों में आक्रोश हो गया हैं ।शुक्रवार  को चंद्रबिहार कालोनी स्थित मंदिर में आम सभा आयोजित हुई उसमें हजारों पुरूष -महिलाएं शामिल हुये । लोगों ने एकमत होकर आवाज दिया की हम जान दे देंगे लेकिन अपने वर्षों से बने घर को आंच नहीं आने देंगे । सरकार के दोरंगी नीति के खिलाफ संघर्ष को लेकर कमिटी गठित किया गया हैं । आम लोगों ने निर्णय लिया है की सड़क से लेकर सदन और कोर्ट तक जाएंगे ।
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