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Saturday, October 16, 2021 at 4:12 AM
दसमुखी काली माता की स्थापना करते भीमानन्द

भीमानन्द ने चमरौहा में दस मुखी काली माता की किया स्थापना

 

चित्रकूट के अति पिछड़े क्षेत्र मानिकपुर अंतर्गत साईं धाम चमरौन्हा में तीन दिवसीय आयोजन सम्पन्न हुआ । तीन दिवसीय आयोजन में कलस शोभा यात्रा , पूजन यज्ञ के बाद 10 मुखी मां काली की मूर्ति और भैरव की मूर्ति की स्थापना की गई। भीमानन्द महाराज के कर कमलों से भव्य प्राण प्रतिष्ठा और भंडारे का आयोजन किया गया।साईं धाम में काली की प्रतिष्ठा से क्षेत्र के लोगो मे खुशी और उत्साह देखने को मिला।
भीमानन्द महाराज के मुताबिक साईं धाम में मूर्तियों की प्रतिष्ठा के साथ साथ क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी काम किये जायेंगे। उन्होंने कहा यह बेहद पिछड़ा इलाका है और यहां न तो गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध है और स्वास्थ्य सेवाएं है इसलिए साईं धाम ट्रस्ट की तरफ से यहां एक बड़ा हॉस्पिटल स्थापित करने का उद्देश्य है जिसमे कैंसर का एक बड़ा अस्पताल होगा और कोशिश होगी कि एक रुपये में लोगो को इलाज मिल सके। इसके अलावा यहां शिक्षण संस्थाओं को भी स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस नवरात्रि में तीन दिनों से कार्यक्रम किये जा रहे है जिसमे कलश यात्रा, नगर भ्रमण और मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। साथ ही आज भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसमें कन्या, ब्राह्मण और क्षेत्र की जनता ने प्रसाद ग्रहण किया है।

मानिकपुर के पाठा क्षेत्र के लिए वरदान की तरह होगा ।भीमानन्द महाराज द्वारा स्थापित साईं धाम ट्रस्ट चित्रकूट के सबसे पिछड़े इलाके मानिकपुर के पाठा वासियों के लिए भविष्य में वरदान की तरह होगा। भीमानन्द महाराज के प्रोजेक्ट के मुताबिक साईधाम आश्रम के साथ साथ इस इलाके में स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए भी बड़े काम करने का है। अगर आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में इस तरह का प्रोजेक्ट तैयार जो जाएगा तो यहां के छात्रों के लिए शिक्षा और यहां के वाशिन्दों को मुफ्त में इलाज की भी व्यवस्था होगी। साईंधाम मन्दिर के बाहर से बहने वाली वरदहा नदी से चार चांद लग रहे है इस धार्मिक स्थल को£साईंधाम मन्दिर के ठीक सामने से वरदहा नदी प्रवाहमान है जो कही न कही इस स्थल की भव्यता में चार चांद लगा रही है। झील की तरफ स्वच्छ और सुरम्य जल में रात्रि में पड़ने वाली चंद्रमा की किरणें बेहद सुंदर प्रतीत होती है। भविष्य में साईंधाम एक बड़े धर्मिक स्थल के रूप में जाना जाएगा।