Thursday, September 23, 2021 at 5:09 AM

बिहार विधानसभा चुनाव: बक्‍सर की सीट पर हवलदार से चुनाव पूर्व हार गए गुप्‍तेश्‍वर पांडेय

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में सियासी उठापटक जारी है। बक्‍सर विधानसभा सीट को लेकर एक रोचक खबर सामने आ रही है। पुलिस सर्विस से वीआरएस लेने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय जेडीयू का दामन थामकर बक्सर सीट की सियासी पिच तैयार कर रहे थे. लेकिन कभी हवालदार रहे परशुराम चतुर्वेदी ने ऐसे समीकरण सेट किए कि डीजीपी का पद छोड़कर विधानसभा पहुंचने का ख्वाब देने वाले गुप्तेश्वर पांडेय के अरमानों पर पानी फिर गया। गुप्तेश्वर पांडेय के राजनीतिक में कदम रखने के बाद से बक्सर विधानसभा सीट पर सस्पेंस बन गया था. यह सीट परंपरागत तौर पर बीजेपी की रही है, लेकिन 2015 के चुनाव में आरजेडी ने जीत दर्ज की थी. ऐसे में गुप्तेश्वर पांडेय बक्सर की पिच को सियासी तौर पर तैयार करने में जुट गए. उन्होंने खुद को बक्सर का बेटा और बिहार के सिपाही के तौर पर सोशल मीडिया में प्रचार कर रहे थे. ऐसे में यह पूरी तरह से लगने लगा था कि बक्सर सीट जेडीयू के खाते में चली जाएगी। गुप्तेश्वर पांडेय के पक्ष में सारे समीकरण दिख रहे थे. ऐसे में पुलिस की नौकरी में हवलदार पद पर रहे किसान नेता परशुराम चतुर्वेदी ने बीजेपी से चुनाव लड़ने का अपना दावा ठोक दिया. ऐसे में बीजेपी के हवलदार रहे परशुराम जेडीयू के डीजीपी पद छोड़कर आए गुप्तेश्वर पांडेय पर हावी पड़ गए. एनडीए के सीट शेयरिंग फॉर्मूल के तहत बक्सर सीट बीजेपी के कोटे में चली गई है, जिसके बाद पार्टी ने परशुराम चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाया है। बीजेपी ने अपने किसान नेता और पूर्व में हवलदार रहे परशुराम चतुर्वेदी को टिकट देकर बक्सर में एक नई सियासी बहस को जन्म दे दिया. बहरहाल अब कहा जा रहा है डीजीपी को एक हवलदार ने पटकनी दे दिया. यही नहीं जेडीयू ने अपने 115 लोगों की जो लिस्ट जारी है, उसमें भी किसी भी सीट पर गुप्तेश्वर पांडेय को टिकट नहीं दिया है. टिकट न मिलने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने साफ कर दिया है कि वह इस बार बिहार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि वह अपने अनेक शुभचिंतकों के फोन से परेशान हैं। मैं उनकी चिंता और परेशानी भी समझता हूं. मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूंगा लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा. हताश निराश होने की कोई बात नहीं है. धीरज रखें. मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है. मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूंगा. कृपया धीरज रखें और मुझे फोन नहीं करे. बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है।

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