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वट सावित्री पर्व को लेकर बाजारों में बढ़ी चहल-पहल

बाजारों में बढ़ी चहल-पहल

अरवल। वट सावित्री पर्व को लेकर पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गयी हैं। महिलाएं पूजन सामग्री में कपड़े के बने सत्यवान-सावित्री की मूर्ति, बांस का पंखा, लाल धागा, बांस की डलिया आदि की खरीदारी कर रही हैं। इसके अलावा चूड़ियों व अन्य सामग्रियों की दुकानें सजी हुई है। जिले के विभिन्न चौक-चौराहों पर संबंधित खरीदारी चल रही है। कोरोना संक्रमण के कारण फिलहाल आठ जून तक शर्तों वाली लॉकडाउन लगी हुई है। लेकिन ऑड-ईवन फार्मूले से दुकानें खुल रही हैं। इस कारण खरीदारी धीरे-धीरे तेजी पकड़ रही है। 


सामूहिक रूप से वट सावित्री पूजन करती है महिलाएं वट सावित्री पूजा के संबंध में खुशबू देवी, नेहा देवी, संध्या शर्मा, लवली शर्मा, नीलम देवी, अंशु कुमारी आदि सुहागिन महिलाओं ने बताया की यह पूजा महिलाएं सामूहिक रूप से करती है। चाहे यह पूजा वट वृक्ष के नीचे हो या प्रतीकात्मक रूप से वट वृक्ष की पूजा महिलाएं आंगन में करें। इस पूजन के समय महिलाएं वट वृक्ष में जल फूल, प्रसाद को अर्पण कर रक्षा सूत्र बांधकर करती हैं। पूजन के क्रम में वट सावित्री पूजन कथा का वाचन भी किया जाता है। जिसमें पतिव्रता सावित्री द्वारा पति के लिए यमराज से संघर्ष की कहानी है। इसके पश्चात उपस्थित लोगों के बीच चना, शक्कर, पकवान, मिष्ठाण प्रसाद के रूप में वितरण किया जाता है। वट सावित्री व्रत पूजा विधि

शादीशुदा महिलाएं इस दिन लाल या पीली साड़ी पहनकर दुल्हन की तरह सजें। अब बांस की पूजा वाली डलिया में पूजा का सारा सामान व्यवस्थित तरीके से रख लें। अब वट के पेड़ के नीचे के स्थान को अच्छे से सा़फ कर वहां एक चौकी लगाकर सावित्री और सत्यवान की मूर्ति स्थापित कर दें। इसके बाद फूल, रोली, कलावा, अक्षत, दिया, धूपबत्ती और सिन्दूर से उनका पूजन करें। इसके बाद उन्हें लाल रंग का वस्त्र अर्पित करें और साथ ही फल भी चढ़ाएं। इसके बाद बेना (पंखे) से हवा करें।

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