Main

Today's Paper

Today's Paper

समाज और सरकार के बीच का सेतु है जनता दरबार: बशिष्ठ

बशिष्ठ

पटना। जनता दरबार का कॉन्सेप्ट ख़ुद में एक अच्छा व सराहनीय कॉन्सेप्ट है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी शुरुआत भी पहले की तुलना में अच्छी की है और धीरे-धीरे यह कोशिश राज्य की संस्कृति का हिस्सा बन जाएगी, इसमें मुझे कोई संकोच नहीं दिखता।

लोग जानते हैं कि राज्य की संस्थाएं कई लेयर्स में काम करती हैं और उन लेयर्स तक सत्ता की दखलंदाजी हो और सरकारी नीतियाँ वास्तविक रूप में जमीन पर पहुँचकर जन उपयोगी हो, इसकी समीक्षा भी इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य है। इस बार के जनता दरबार कार्यक्रम को न्याय, पारदर्शिता और त्वरित समस्याओं का निराकरण ने इसे ख़ास बना दिया है।

स्त्री-शिक्षा, मद्य-निषेध, न्याय के साथ विकास, लॉ एंड ऑर्डर को संभालने के साथ ही 'जनता दरबार' के कॉन्सेप्ट ने नीतीश कुमार को न सिर्फ़ अबतक लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित किया है अपितु उन्हें 'सुशासन बाबू' के तौर पर भी विख्यात करते हुए कई दफे सत्ता के शीर्ष पर बैठाया है। जनता के बीच से फीडबैक, अधिकारियों की कार्य-प्रणाली और सत्ता के आचरण की समयानुकूल समीक्षा 'जनता दरबार' को बहुत मायनों में जन कल्याणकारी नीतियों से जोड़ देता है। वह इस मायने में भी कि लोकतंत्र में हाशिए पर बैठा हुआ आदमी भी सत्ता में अपनी भागीदारी को सुनिश्चित करता है।

जनता दरबार में शामिल होने के लिए नवादा से चलकर आई ईशु कुमारी कहती हैं, "हम मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन राशि को लेकर यहाँ आए हैं। हम साल 2019 में मैट्रिक और साल 2021 में इंटर फ़र्स्ट डिविज़न से पास किए लेकिन प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। ऑनलाइन अप्लाई भी किए लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला। मोबाइल पर देखे कि जनता दरबार लग रहा है। अप्लाई कर दिए। बीडीओ का फ़ोन आया और फिर यहां तक आ गए। उम्मीद है कि हमको प्रोत्साहन राशि मिल जाएगी।"

यहां छात्रवृत्ति, शिक्षा वास्ते लोन, पेंशन, राशन, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, सरकारी आवास, दहेज-उत्पीड़न, संपत्ति-विवाद जैसे सैकड़ों मसलों के साथ प्रत्येक सोमवार को सैकड़ों लोग आते हैं। जनता से घिरे मुख्यमंत्री जनता दरबार में पूरे जोश-खरोश के साथ उनकी समस्याओं को सुनकर उसका निपटारा करते हुए विभागीय स्तर पर कई तरह के सुधार की गुंजाइशों को लेकर अधिकारियों को निर्देश देते हैं। इस पूरी कवायद में नीतीश कुमार सत्ता के व्याकरण को बदलने की कोशिश भी कर रहे होते हैं।

इस पूरी घटना को देखते हुए यह सच साबित होता है कि वर्तमान राजनीतिक परिवेश में नीतीश कुमार जैसा 'एक्सपेरिमेंटल लीडर' देश भर में विरले है।

बिहार जैसे राज्य में सुदूर खेतों तक बिजली और पानी का सपना, मद्य-निषेध कानून, दहेजबन्दी, अच्छी सड़कें, स्वास्थ्य सुविधा और दुरुस्त कानून-व्यवस्था मुख्यमंत्री के गुड गवर्नेंस का ही ठोस परिणाम है। जनता दरबार आने वाले समय में गुड गवर्नेंस का पर्याय बन उभरेगा, इसमें कोई शक नहीं। मैं उम्मीद करता हूँ कि इसी तरह जनता-दरबार आगे भी सजता रहे और लोकतांत्रिक मूल्यों में जनता की आस्था बढ़ती रहे ताकि लोकशाही आबाद रहे। 

Share this story