Saturday, November 27, 2021 at 5:57 AM

योजनाबद्ध विकास हो तो पर्यटन हब बन जाएगा बुंदेलखंड

झांसी। प्रकृति बुंदेलखंड की गोद में रची बसी है। इतिहास यहां पग – पग पर समाया हुआ है। धर्म के मामले में इस अंचल की अलग ही महिमा है। भागवत पुराण से लेकर रामायण एवं महाभारत तक इसी धरती पर रची गई हैं। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इस अंचल में देखने – दिखाने के लिए दर्जनों स्थल हैं, लेकिन उचित संरक्षण एवं विकास के अभाव में उनकी कीमत का अंदाजा नहीं लग पा रहा। देश व विदेश के लाखों पर्यटक हर साल बुंदेलखंड आते हैं, लेकिन तीस फीसदी ही यहां स्टे करते हैं। बाकी बुंदेलखंड के मप्र में शामिल खजुराहो, ओरछा या सोनागिरी चले जाते हैं।
पर्यटन की दृष्टि से बुंदेलखंड बेहद धनी है। घने जंगल, पहाड़ियां, झरने, बांध, नदियां एवं धार्मिक दृष्टि से रामायण व महाभारत कालीन पुरावशेष यहां की धरोहर हैं। बुंदेलखंड के मुख्यालय झांसी को पूरे विश्व में केवल महारानी लक्ष्मीबाई के किले के लिए जाना जाता है, जबकि यहां दर्जनों ऐसे स्थान हैं जो पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई का किला, महाराजा गंगाधर राव की समाधि, लक्ष्मी मंदिर, सेंट ज्यूड्स चर्च, झोकनबाग, बरुआसागर का जराय का मठ, स्वर्गाश्रम का झरना, मऊरानीपुर का केदारेश्वर मंदिर, ललितपुर के देवगढ़ में गुप्त, गुर्जर, प्रतिहार, गोंड एवं मुसलिम शासकों द्वारा निर्मित गुफाएं, जैन मंदिर, गोविंदसागर बांध, माताटीला बांध, महोबा में रहीला सागर, कीर्ति सागर, विजय सागर व मदन सागर झील, परमाल पैलेस, मनिया देवी मंदिर, पीर मुबारक शाह की दरगाह, चंद्रिका देवी का मंदिर, आल्हा ऊदल की समाधि, चंदेलकालीन कुंड, गोरखगिरी की पहाड़ियां, चरखारी का किला, चित्रकूट में रामायण से संबंधित अनेक स्थल विद्यमान हैं। इसके अलावा अजेय कालिंजर का किला, कालपी की लंका पहाड़ी, एरच में हिरण्यकश्यप की प्राचीन नगरी के अवशेष सहित पूरे बुंदेलखंड में किले और गड़ियां भी हैं।
यह ऐसे स्थान हैं जिनका जिक्र इतिहास में है, लेकिन शासन की उपेक्षा के चलते यह स्थल खंडहरों में तब्दील होते जा रहे हैं। बुंदेलखंड राज्य के अस्तित्व में आने से इन स्थलों के विकास पर ध्यान दिया जा सकता है ताकि उसे पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा सके। इससे जो पर्यटक खजुराहो, चित्रकूट, ओरछा एवं सोनागिरी आने के लिए झांसी में उतरते हैं, वे यहां ज्यादा से ज्यादा दिन रुककर अन्य स्थलों का भी अवलोकन कर सकें।
योजनाओं पर नहीं हो पा रहा अमल
बुंदेलखंड के पर्यटन विकास के लिए वर्ष 2007 में महत्वपूर्ण योजना बनाई गई थी, जिसे बुंदेलखंड परिपथ नाम दिया गया था। उद्देश्य था कि बुंदेलखंड परिपथ के माध्यम से पैकेज टूर बनाया जाए और देशी- विदेशी पर्यटकों को समयबद्ध कार्यक्रम के तहत बुंदेलखंड के सभी स्थान दिखाए जा सकें और उन्हें बुंदेली संस्कृति, लोक कलाओं व खानपान से परिचित कराया जा सके। लेकिन यह फाइल शासन के पास धूल फांक रही है।