कालीन नगरी की जलनिकासी समस्या दिन ब दिन गंभीर

भदोही । पालिका प्रशासन द्वारा दो साल पहले शासन को भेजा गया 278 करोड़ का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पडा है। कोरोना महामारी के चलते प्रस्ताव की फाइल नगर विकास मंत्रालय में अटकी जो आज तक निकल नहीं सकी। जबकि कालीन नगरी की जलनिकासी समस्या दिन ब दिन गंभीर रूप लेती जा रही है। निकासी के अभाव में बिन बरसात ही गली मोहल्लों में जलजमाव बना रहता है। जबकि बरसात में कालीन नगरी के अधिकतर मोहल्लों, सड़कों पर जल प्लावन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। समय रहते प्रयास कर सीवरेज सिस्टम दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब होगी।

कालीन नगरी की जलनिकासी समस्या चार दशक से सिरदर्द बनी हुई है। निकासी के उचित प्रबंध न होने के कारण बारिश होते ही प्रमुख मार्गों सहित 60 फीसद गली मोहल्लों में जलप्लावन की स्थिति हो जाती है। कुछ वार्डों में तो बिन बारिश ही जलजमाव की स्थिति रहती है। वर्तमान समय भी जल्लापुर नईबस्ती, छेड़ीबीर सहित कुछ मोहल्लों में जलजमाव बना हुआ है।

जलनिकासी के लिए 1970-80 के दशक में तत्कालीन पालिका बोर्ड ने सीवेरज व्यवस्था की थी। उस समय नगर की कुल आबादी 25 से 30 हजार थी। जैसे जैसे आबादी बढ़ती गई वैसे वैसे समस्या बढ़ती गई। खाली पड़ी जमीनों पर कालीन कंपनियां, कारखाने व भवन का निर्माण हो गया है। यानी अस्थाई निकासी के संसाधन भी धीरे धीरे सिमटते गए और पुरानी व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। जलनिकासी समस्या के समाधान की दिशा में काफी काम किया गया। काफी हद तक सफलता भी मिली है। बावजूद घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अब भी समस्या है। शासन को स्टीमेट भेजा गया है। कोरोना का कारण धन आवंटन नहीं हो सका। जिलाधिकारी के माध्यम से रिमाइंडर भी कराया जा चुका है। धन की व्यवस्था होते ही नए सिरे से सीवरेज पर काम किया जाएगा।

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