Thursday, September 23, 2021 at 5:47 AM

वाणिज्य कर अधिकारी बेलगाम, विभागीय भ्रष्टाचार की सूचना को कर रहे बड़े अधिकारी नजरअंदाज

मुज़फ्फरनगर (तरुणमित्र )वाणिज्य कर के अधिकारी बेलगाम हो गये हैं. विभाग में बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार की लिखित सूचना देने पर भी कोई कार्यवाही नहीं होती है. जिले से लेकर मंडल तक के अधिकारी मौन बैठे हुए हैं. पत्रकारों तक को भी गुमराह करने में इनका कोई सानी नहीं है.

दैनिक तरुणमित्र अखबार के 4अक्टूबर के अंक में (वाणिज्य कर अधिकारी सरकार को लगा रहे चूना )सचल दल की भरस्टाचार की खबर लगी थी. जिसमे बताया गया था कि सचल दल के तीन असिस्टेंट कमिश्नरों ने कोरोना काल में अपनी प्राइवेट गाड़ियों से सड़क पर चेकिंग करके मोटी अवैध कमाई की थी. और ऐसा उनके उच्चाधिकारीयों की सहमति के बिना सम्भव नहीं था.

कोरोना काल में तीनों सचल दल कमिश्नर व उनकी सरकारी गाड़ियां कोरोना ड्यूटी में लगी थी. जे. सी. शरद कुमार शुक्ला के अनुसार इनकी सचल दल टीम ने अप्रैल, मई, जून 2020 में कोई चेकिंग नहीं की, न ही कोई राजस्व जमा किया किन्तु जुलाई 2020में चेकिंग करके तीन लाख चालीस हज़ार व अगस्त 2020में मात्र 77हजार रूपये ही राजस्व में जमा किया.गाड़ियों की चेकिंग के बारे में पूछने पर शुक्ला जी ने बताया था कि मुख्यालय से सूचना आने पर प्राइवेट गाड़ियों से चेकिंग करना हमारी मजबूरी थी. जबकि विभागीय नियमों के अनुसार प्राइवेट गाड़ियों से चेकिंग नहीं हो सकती.

इस बारे में अडिशनल कमिश्नर ग्रेड एक आर. के. कटियार से बात हुई तो उन्होंने कहा था कि मैं जाँच कराऊंगा. आज तीन महीने बाद श्री कटियार से फोन पर जांच के बारे में पूछा गया तो उनका कहना है कि ये हमारा विभागीय मामला है. आपको सूचना चाहिए तो जन सूचना के तहत मांग सकते हैं.

जब जॉइन्ट कमिश्नर s.I.B. शरद कुमार शुक्ला से जाँच के बारे में फोन पर पूछा तो उन्होंने बताया कि इस तरह की किसी जाँच की मुझे कोई जानकारी नहीं है. अब सवाल यह है कि इस तरह के भरस्टाचार की जाँच क्या लखनऊ बैठे उच्चाधिकारी कराएंगे या जिस सरकार के राजस्व को चूना लगाया जा रहा है, उस विभाग के मंत्री व प्रमुख सचिव कराएंगे. हमारी तो मजबूरी है हमें तो जन सूचना अधिकार का आवेदन लगाना ही पड़ेगा.

Loading...