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नजर अंदाज मत करें kids में ऑनलाइन गेम की लत – डॉ. अनिल कुमार दूबे

मानसिक बीमारी के साथ kids बच्चों को हिंसक बना रहे गेम

बस्ती – आपके पाल्य को अगर ऑनलाइन गेम की लत पड़ गई है तो उसे नजर अंदाज मत करें। तत्काल मनोरोग चिकित्सक से संपर्क कर उसका नियमित इलाज व काउंसिलिंग कराएं। ऑनलाइन गेम kids बच्चों को मानसिक रूप से बीमार बनाने के साथ ही हिंसक भी बना रहे हैं। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अनिल कुमार दूबे का कहना है कि ओपीडी में मानसिक रूप से बीमार kids बच्चों की संख्या बढ़ी है। परिवार के लोगों का कहना है कि बच्चे के व्यवहार में परिवर्तन आ रहा है, बच्चे हिंसक तक हो जा रहे हैं। जिला अस्पताल में शहर के एक ऐसे ही छात्र का सफलता पूर्वक इलाज किया गया है। अब वह छात्र पिछले 10 दिन से मोबाइल नहीं छू रहा है।

कोविड काल से ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान मोबाइल फोन बड़ी संख्या में बच्चों के जीवन का हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई के दौरान कुछ बच्चों को विभिन्न ऑनलाइन गेम की लत पड़ जा रही है। गेम में ज्यादा समय गुजारने पर परिवार की ओर से टोका-टाकी की जाती है। गेम की लत ऐसी है जिसमें बच्चों के दिमाग में हत्या तक के ख्याल आने लगते हैं।

डॉ. दूबे का कहना है कि किताबों से दूर होते बच्चे अब मोबाइल पर ही सारा कुछ ढूंढने, पढ़ने और जानने की इच्छा रखने लगे हैं। ऑनलाइन गेमिंग इस कदर बच्चों के जीवन शैली में हावी हो गई है कि बच्चे सोना, पढ़ना एवं खेलना सब मोबाइल के साथ ही कर रहे हैं। अभिभावक के लिए चिंता का विषय है, कि बच्चे देश का भविष्य हैं और आने वाला भविष्य मोबाइल एडिक्शन का शिकार हो रहा है। ऐसी समस्या से कैसे निजात पाया जाए। यहां आने वाले हर अभिभावक के मन में या चिंता बनी हुई है।

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प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी गैर संचारी रोग आनंद गौरव शुक्ला का कहना है कि टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल कर हम सही अर्थ में डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कर सकते हैं। इस मुहिम में अभिभावक को भी टेक्नोलॉजी का ज्ञान आवश्यक है। उन्होंने बताया कि गूगल फैमिली लिंक के माध्यम से आप बच्चों को उम्र के अनुसार मोबाइल की उपयोगिता संबंधित लिमिटेशन या बाध्यता रख सकते हैं। बच्चों को मोबाइल दे तो उस मोबाइल में उनकी उम्र अनुसार ही चीजों का एक्सेस करने अनुमति रहे।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के साइकेट्रिक सोशल वर्कर डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि हम लोग स्कूल प्रोग्राम के तहत विद्यालयों में जाकर मोबाइल एडिक्शन के प्रति जागरूक करेंगे और उस से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में शिक्षक और परिजनों को भी अवगत कराएंगे। जिला चिकित्सालय के मानसिक विभाग में दवा एवं काउंसलिंग के माध्यम से इलाज किया जाता है। इसकी ओपीडी जिला चिकित्सालय में सोमवार, बुधवार एवम शुक्रवार को चलती है।