Monday, December 6, 2021 at 5:34 AM

दशहराः धूमधाम से मना असत्य पर सत्य की विजय का पर्व

मथुरा। श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में श्रीरामलीला आयोजन की परंपरा में इस बार भी महाविद्या के मैदान पर रावण दहन नहीं हुआ। रावण दहन लीला की परंपरा सिर्फ मसानी स्थित चित्रकूट पर चौपाई गायन से ही निभाई गई। कोविड की बंदिशों के चलते जिला प्रशासन ने लीला मंचन के साथ रावण दहन की अनुमति प्रदान नहीं की है। हालांकि देहात में कई जगह रामलीलाएं हुई और चल रही हैं। रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले दहन किए गए। दशहरा की धूम रही।
श्री रामलीला सभा मथुरा के तत्वावधान चित्रकूट धाम पर रावण व अहिरावण वध की लीला का रामचरित मानस की चौपाई गायन व वर्णन गणेश व्यास द्वारा किया गया। पाताल लोक से अपने प्रतापी पुत्र अहिरावण को बुलाने के लिए रावण भगवान शंकर जी की उपासना करता है। रावण के ध्यानमग्न होने से पालान में अहिरावण का मन विचलित होता है। वह लंका में रावण के पास पहुंच कर कारण जानना चाहता है। रावण युद्ध का पूरा समाचार सुनाने के बाद शत्रुओं का नाष का उपाय करने को कहता है। अपने चाचा विभीषण का वेष बनाकर रामादल में मोहिनी मंत्र से सभी
को निद्रित करके राम व लक्ष्मण को पाताल में कामदा देवी की बलि चढाने के लिये ले जाता है । हनुमानजी प्रभु की खोज में जाते समय मार्ग में गर्भवती गिद्धनी व गिद्ध के संवाद से स्पष्ट हो जाता है कि अहिरावण प्रभु राम व लक्ष्मण को ले गया है। हनुमान जी पाताल लोक में अपने पुत्र मकरध्वज से मिलते हैं जो अहिरावण की सेवा में लगा है। वह दोनों भाईयों का पता बताता है। हनुमानजी द्वारा अहिरावण का वध कर मकरध्वज को पाताल का राजा बना कर राम व लक्ष्मण को रामादल में ले आते हैं। अहिरावण की मृत्यु के बाद रावण स्वयं युद्ध करने जाता है।
भयंकर युद्ध होता है। युद्ध में ब्रह्मास्त्र चलाकर लक्ष्मण को मूर्छित कर देता है। यह देख हनुमानजी रावण पर मुष्टिक प्रहार करते हैं, रावण मूर्छित होकर गिरता है, फिर मूर्छा टूटने पर उठता है। लक्ष्मण की मूर्छा टूटने पर वे रावण को परास्त कर लंका लौटा देते हैं। रावण विजय यज्ञ करता है। वानर भालू उसके यज्ञ का विध्वंष कर देेते हैं। तत्पष्चात् राम व रावण के युद्ध में रावण की मायावी शक्तियों का प्रयोग राम द्वारा नष्ट कर रावण के नाभि में बने अमृत कुण्ड पर अग्नि वाण चलाने पर रावण राम राम कहते हुए पृथ्वी पर गिर पड़ता है। राम राजनीति के ज्ञाता व महान पंडित रावण से राजनीति की षिक्षा के लिए लक्ष्मण को भेजते हैं। रावण षिक्षा प्रदान करता है व श्रीराम से कहता है कि विजय मेरी ही हुई है क्योंकि मैं आपके बैकुण्ठ लोक में जा रहा हूं लेकिन आप मेरे जीवित रहते हुए लंका में प्रवेष नहीं कर पाए। श्रीराम मुस्कुरा जाते हैं। सीता जी की अग्नि परीक्षा के बाद प्रभु उन्हें वामांग लेते हैं। इस मौके पर सभापति जयन्ती प्रसाद अग्रवाल, प्रधानमन्त्री मूलचन्द गर्ग, उपप्रधानमन्त्री प्रदीप कुमार, कोषाध्यक्ष शैलेष अग्रवाल सर्राफ, बांकेलाल, गिरधारीचरण, नरेन्द्र मोहन मित्तल, योगेन्द्र अग्रवाल, अषोक सक्सैना, ओमप्रकाष अग्रवाल, जे.पी. अग्रवाल, मनोहर लाल जज सहाब, राजकुमार सूतिया, महेष चन्द आदि प्रमुख थे।