UKADD
Saturday, October 16, 2021 at 5:39 AM

बिजली संकट के लिए सरकार बताये किसके हाँथ कोयले की कालिख से रगे हैं- प्रमोद तिवारी

प्रतापगढ़  । केन्द्रीय कांग्रेस वर्किग कमेटी के सदस्य तथा यूपी आउटरीच एण्ड कोआर्डिनेशन कमेटी प्रभारी प्रमोद तिवारी ने कोयला संकट के चलते देश तथा प्रदेश मे उत्पन्न अभूतपूर्व विद्युत आपूर्ति के संकट को चिंताजनक हालात ठहराया है।तिवारी ने कहा कि भाजपा और गैरभाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी कोयले की भयंकर कमी पर चिंता जताकर इस गंभीर संकट को लेकर विद्युत उत्पादन जारी रखने को लेकर देश के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने कहा कि कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित कराना सीधे तौर पर केंद्र सरकार की जबाबदेही है। ऐसे मे बकौल प्रमोद तिवारी मोदी सरकार त्यौहारों के सीजन को देखते हुए हर हाल मे कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित कराये और अबाध रूप से विद्युत उत्पादन जारी रखने मे सहायक बनें।
मंगलवार को लालगंज नगर स्थित विधायक मोना के कैम्प कार्यालय पर पत्रकार वार्ता मे कांग्रेस वर्किग कमेटी के सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि भारत एशिया महाद्वीप मे चीन के बाद सबसे अधिक दूसरा कोयला खपत करने वाला देश है। उन्होनें कोयले संकट को लेकर तीखा सवाल भी दागा कि यह भी जांच का विषय है कि इस संकट के पीछे कौन है और क्यों है तथा उसका मकसद क्या है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि कोयले की कमी के चलते कई तापीय विद्युत गृह बंद होने के कगार पर है और उत्तर प्रदेश मे भी अभूतपूर्व विद्युत संकट से मध्यम वर्ग तथा किसान व लघु उद्यमी एवं पढ़ने लिखने वाले नौजवान त्रस्त हो उठे है। सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने सरकार से कहा है कि कोयले के अचानक इस गंभीर संकट की जांच होनी चाहिये कि आखिर किसने कोयले की कमी का अप्राकृतिक संकट पैदा किया और किसने कोयले की आपूर्ति तक में दलाली खायी। श्री तिवारी ने तंज कसा कि यह जग जाहिर होना चाहिये कि किसके हाथ कोयले की कालिख से भी रंगे है। उन्होनें आशंका जताई कि जांच का गंभीर पहलू यह होना चाहिये कि इसके पीछे कही एनटीपीसी के पावर हाउस पूंजीपतियों को बेंच दिये जाने का तो षडयंत्र नही रचा गया है। सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने जम्मू कश्मीर के पुंछ मे सेना के जेसीओ समेत पांच जाबांज जवानों की शहादत को भी दुखद ठहराते हुए पीएम से आतंकवाद को भारत भूमि से समाप्त करने के लिए हर संभव कदम उठाये जाने पर जोर भी दिया है। श्री तिवारी ने पीएम को सवालों के घेरे मे खड़ा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने नोटबंदी और उसके बाद जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद आतंकवाद की समाप्ति का दावा किया था।
तिवारी ने कहा कि अब प्रधानमंत्री बतायें कि पांच दिनों मे ही वहां स्कूल शिक्षक एवं व्यापारियों सहित सात लोगों की आतंकवादियों ने हत्या कर दी और हमारे पांच जाबांज जवान शहीद हुए तो पीएम की खामोशी क्यों। तिवारी ने लद्दाख मे चीन के अड़ियल व अव्यवहारिक रवैये के कारण देश के भू-भाग पर चीन के ताजा निर्माण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होनें कहा कि मोदी सरकार की राजनीतिक इच्छा शक्ति मे कमजोरी के चलते इस अवैध निर्माण को खाली कराने की सैन्य अधिकारियों की वार्ता का असफल होना एक बड़ी कूटनीतिक विफलता भी साबित हुई है। प्रमोद तिवारी ने लखीमपुर खीरी काण्ड पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को रौंदकर उनकी निर्मम हत्या करने वाले दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होने तक कांग्रेस तथा प्रदेश की जनता चुप नही बैठेगी। उन्होनें सरकार से कहा कि वह सत्ता के अहंकार मे डूबे गृह राज्यमंत्री को बर्खास्त करने मे विलम्ब न करते हुए किसानों की हत्या की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी मे जांच कराये।तिवारी ने कहा कि दोषियों को जल्द से जल्द दण्डित किया जा सके इसके लिए इस प्रकरण का फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपा जाना चाहिये। प्रमोद तिवारी ने कहा कि लखीमपुर कांड के बाद तो सरकार प्रायश्चित कर फौरन तीनों काले कृषि कानून वापस लिये जाने का ऐलान करे। लखीमपुर खीरी मे मारे गये किसानों को न्याय दिलाने के लिए पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी तथा कार्यकर्ताओं के जारी संघर्ष की भी सीडब्ल्यूसी मेंबर ने सराहना की। तिवारी ने दावे भरे अंदाज मे कहा है कि मंत्री पुत्र की गिरफ्तारी प्रियंका के नेतृत्व मे कांग्रेस के संघर्ष का ही परिणाम है।
वहीं सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने नवरात्र पर क्षेत्र के ननौती, मंगापुर, उदयपुर, अठेहा, सांगीपुर, बाबा घुइसरनाथ धाम, वर्मा नगर, राजेन्द्र नगर एवं स्थानीय बाजार मे सजे देवी पाण्डालों पर पहुंचकर मत्था टेका। तिवारी ने लोगों से कहा कि देवी की शक्ति हमें सदैव सुख और विकास को नुकसान पहुंचाने वाली नकारात्मक शक्तियों के खिलाफ अनवरत संघर्ष की प्रेरणा दिया करती है। इस मौके पर प्रतिनिधि भगवती प्रसाद तिवारी, मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल, प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी, प्रमुख अमित प्रताप सिंह, पवन शुक्ल, सुधाकर पाण्डेय, डा. अमिताभ शुक्ल, दृगपाल यादव, रामकृपाल पासी, रिंकू सिंह परिहार, लल्लन सिंह, केडी मिश्र, रामबोध शुक्ल, छोटे लाल सरोज, अंजनी कौशल, विकास मिश्र, देवी प्रसाद मिश्र, पप्पू जायसवाल, मुन्ना तिवारी, राजेन्द्र यादव, शैलेंद्र मिश्र, मुन्ना शुक्ला, सोनू शुक्ल, विनय पाण्डेय, शास्त्री सौरभ, अंशुमान तिवारी, ओम पाण्डेय, सिंटू मिश्र आदि रहे।