Saturday, January 22, 2022 at 2:51 AM

आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने सेप्सिस की समस्याओं में श्वेत रक्त कोशिका मार्करों की भूमिका दिखाई

रुड़की (देशराज)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के शोधकर्ताओं ने गंभीर संक्रमण और सेप्सिस के दुष्परिणाम में कुछ खास इम्यून सेल मार्करों की भूमिका दर्शायी है। आईआईटी रुड़की के बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रो. प्रणिता पी सारंगी के नेतृत्व में यह शोध किया गया। शोध का वित्तीयन बायोकेयर महिला वैज्ञानिक अनुदान और जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के अभिनव युवा जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ पुरस्कार अनुदान से किया गया। शोध के परिणामस्वरूप सेप्सिस की समस्याओं में इम्यून सेल मार्करों की भूमिका की गहरी जानकारी मिली है। श्वेत रक्त कोशिकाएं – न्यूट्रोफिल, मोनोसाइट्स और मैक्रोफाज मृत कोशिकाओं और बैक्टीरिया एवं अन्य रोगजनक जैसे बाहरी आक्रमणकारियों का सफाया करती हैं। वे खून से संक्रमण वाले हिस्से में पहंुच कर रोग पैदा करने वाले बाहरी पदार्थों का सफाया करती हैं। हालांकि जब संक्रमण बेकाबू और गंभीर हो जाता है (जिसे आमतौर पर ‘सेप्सिस’ कहते हैं) तो प्रतिरक्षा कोशिकाएं भी असामान्य रूप से सक्रिय और स्थान विशेष पर केंद्रित हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप ये कोशिकाएं समूह में शरीर के अंदर चारों ओर घूमती हैं और महत्वपूर्ण अंगों जैसे फेफड़े, गुर्दे और यकृत में जमा हो जाती हैं। इससे एक साथ कई अंगों के नाकाम होने या फिर मृत्यु का खतरा भी रहता है।