Wednesday, December 8, 2021 at 3:17 PM

कई मुहल्लों में महीनों से कूड़ा उठाने की जगह कूड़ा डंपिग यार्ड बना

बहराइच। कई मुहल्लों में महीनों से कूड़ा उठाने की जगह कूड़ा डंपिग यार्ड बना दिया गया, जिससे स्थानीय लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। नालियों के चोक होने से घरों से निकलने वाला पानी सड़क पर बह रहा है। इन्हीं सब लापरवाही के चलते शायद जिला स्वच्छता रैंकिग में 99 रैंक नीचे पहुंच गया है। इंदौर ने लगातार पांचवीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल किया। इसके पीछे प्रशासनिक तंत्र के साथ ही यहां के बाशिदों का अहम योगदान है। 288वीं रैंक पाने वाले बहराइच जिले को दो साल पहले ही ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। नगर पालिका व नगर पंचायत में कागजों में नगरों की चमचमाती तस्वीर पेश किए जाने पर शासन ने इन्हें आदर्श घोषित कर दिया, लेकिन हकीकत बिल्कुल परे है। नगर में कचरे के उठान व निस्तारण की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। नाले-नालियां गंदगी से पटे हुए हैं। सफाई के नाम पर बड़े पैमाने पर खेल किया जाता है।

मुहल्लों में में जगह-जगह कूड़े का अंबार लगा रहता है। स्वच्छता की गाड़ी पटरी से उतर गई है। नगर पालिका की कार्यप्रणाली स्वच्छता के मामले में काफी लचर है। मौलिक सुविधाओं के नाम पर नगरों में ऐसा कुछ भी नहीं, जिसे उल्लेखनीय कहा जाए। केंद्र सरकार नगरीय व ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता को लेकर स्वच्छ भारत मिशन संचालित कर रही है। इसको लेकर हर साल सर्वे भी कराया जा रहा है। लोगों से फीडबैक लेकर स्वच्छता की हकीकत परखने का प्रयास किया जा रहा। विडंबना यह कि स्वच्छता सर्वेक्षण का प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता है। इसकी वजह से 90 फीसद लोग स्वच्छता सर्वेक्षण से अनभिज्ञ हैं। कदम-कदम पर लापरवाही का नतीजा है कि जिला स्वच्छता रैंकिग में चारों खाने चित होकर 99 रैंक पीछे पहुंच गया।

संबंधित अधिकारियों संग बैठक कर बेहतर साफ-सफाई की रूपरेखा तैयार की गई है। लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रचार-प्रसार भी कराया जा रहा है।