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WTO में भारत के प्रस्ताव का समर्थन न करने की अपील

WTO

वाशिंगटन। अमेरिका के 12 रिपब्लिकन सांसदों ने बाइडन प्रशासन से भारत और दक्षिण अफ्रीका की ओर से विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के समक्ष रखे गए उस प्रस्ताव का समर्थन न करने की अपील की है, जिसमें कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के बीच कुछ बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधित पहलुओं (ट्रिप्स) में अस्थायी छूट देने का अनुरोध किया गया है।

 

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाय को मंगलवार को लिखे गए पत्र में इन 12 प्रभावशाली सांसदों ने तर्क दिया है कि अगर अमेरिका बौद्धिक संपदा अधिकारों को छोड़ देगा, तो यह नवोन्मेष एवं उत्पादन को नुकसान पहुंचाएगा और इसके परिणामस्वरूप कम लोगों को टीका लग पाएगा। यह पत्र भारत और दक्षिण अफ्रीका के नेतृत्व में 60 विकासशील देशों द्वारा इस संबंध में दिए गए प्रस्ताव के जवाब में लिखा गया है।

 

पत्र में कहा गया, “अमेरिका को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सभी सदस्यों के लिए बौद्धिक संपदा व्यापार संबंधित पहुलओं पर समझौते के कुछ अंशों को छोड़ देने के भारत, दक्षिण अफ्रीका और अन्य राष्ट्रों के आग्रह का विरोध करते रहना चाहिए।” उधर, व्हाइट हाउस ने कहा है कि व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाय ने इस प्रस्ताव पर राष्ट्रपति जो बाइडन के समक्ष फिलहाल कोई अनुशंसा नहीं की है।

 

डब्ल्यूटीओ पांच और छह मई को जिनेवा में अपनी आम परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार करेगा। कई डेमोक्रेटिक सांसदों ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के समर्थन में टीके को इन पहलुओं से मुक्त करने का अभियान शुरू किया है।





 

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