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जानें भारत के लिए G-7 सम्मेलन का एजेंडा क्या है खास?

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लन्दन . इस बार के G-7 सम्मेलन  में भारत को यूनाइटेड किंगडम  के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने आमंत्रित किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  सम्मेलन में 12 और 13 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लेंगे. इस बार सम्मेलन की अध्यक्षता यूनाइटेड किंगडम ही कर रहा है और उसने चार प्राथमिकताएं तय की हैं.
पहली प्राथमिकता है, दुनिया कोरोना वायरस से कैसे रिकवरी करे और भविष्य में महामारियों के खिलाफ कैसी तैयारी होनी चाहिए. दूसरी प्राथमिकता है, मुक्त और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देकर भविष्य में समृद्धि बढ़ाने पर विचार हो. तीसरी प्राथमिकता है, जलवायु परिवर्तन पर गंभीरता से विचार हो. चौथी प्राथमिकता है, मुक्त समाज और एक-दूसरे के साझा मूल्यों पर विचार-विमर्श हो.
सम्मेलन में इन मुद्दों पर नेता एक-दूसरे के विचार से अवगत होंगे. कोरोना से ग्लोबल रिकवरी, स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर गंभीर चर्चा हो सकती है. अगर भारत के लिहाज से देखें तो ये सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण है. भारत लंबे समय से मांग करता रहा है कि वैश्विक संस्थाओं और समूहों की दोबारा फ्रेमिंग की जानी चाहिए जो नई भूराजनीतिक स्थितियों को प्रदर्शित करें. हाल के समय में चीन के खिलाफ सख्त दिख रहे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन कोई नया कदम उठाते हैं और 10-11 लोकतांत्रित देशों का कोई नया गठबंधन बनता तो ये एक बड़ा संकेत होगा.
 एक लीक डॉक्यूमेंट से यह भी पता चला है कि  G-7 बैठक में कोरोना वायरस की ओरिजीन को लेकर नए और पारदर्शी अध्ययन की मांग उठ सकती है. पिछले साल कोविड -19 कैसे फैला, यह निर्धारित करने और आगे के अध्ययन के लिए भारत और अमेरिका सहित कई देशों ने जांच की मांग की थी.

इसके अलावा भारत में इस वक्त वैक्सीन की कमी भी है. अमेरिका द्वारा हाल में वैक्सीन बांटे जाने की घोषणा के बाद भारत भी इस वितरण पर निगाह रखेगा. बीते सप्ताह अमेरिका ने कहा था कि वो भारत को 'वैश्विक वैक्सीन रणनीति' के तहत वैक्सीन डोज देगा. जहां राष्ट्रपति बाइडन ने घोषणा की थी वहीं उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत कर भरोसा दिया था.
 

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