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Saturday, October 16, 2021 at 5:09 AM

जयप्रकाश नारायण साहब आमेरिका में पढ़ाई के दौरान करते थे ये काम

दोस्तों पता है आप को जयप्रकाश जी को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए  अमेरिका में पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए खेतों, कंपनियों, रेस्टोरेन्टों इत्यादि में का करना पड़ा था। मजदूर की तरह काम करने के कारण उन्हें श्रमिक वर्ग के परेशानियों का अनुभव हुआ था और तब वे मार्क्स के समाजवाद से प्रभावित हुए थे। आप को बताते चले कि जयप्रकाश नारायण साहब का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गांव में हुआ। नारायण साहब के पिता का नाम हर्सुल दयाल श्रीवास्तव और माता का नाम फूल रानी देवी था।
 बताया जाता है कि  जयप्रकाश साहब जब केवल 18 वर्ष के थे तब उनका विवाह प्रभावती देवी से हुआ था। प्रभावती विवाह के बाद  कस्तूरबा गांधी के साथ गांधी आश्रम में रहती थी । अमेरिका जाकर उन्होंने जनवरी 1923 में बर्कले विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। अमेरिका में अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने खेतों, कंपनियों, रेस्टोरेंट इत्यादि में कार्य किया। इसी दौरान उन्हें श्रमिक वर्ग के परेशानियों का अनुभव हुआ और वे मार्क्स के समाजवाद से प्रभावित हुए। इसके बाद  उन्होंने एम.ए. की डिग्री हासिल की पर पी.एच.डी पूरी न कर सके क्योंकि माता जी की तबियत ठीक न होने के कारण उन्हें भारत वापस लौटना पड़ा। जयप्रकाश नारायण जब 1929 में अमेरिका से लौटे तब देश को आजाद करने के लिए स्वतंत्रता संग्राम तेजी से चल रहा था। धीरे-धीरे उनका संपर्क जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी से हुआ और वो स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने।
कहा जाता है 1932 में सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान जब गांधी, नेहरू समेत अन्य महत्वपूर्ण कांग्रेसी जेल चले गए तब उन्होंने भारत के अलग-अलग हिस्सों मे आंदोलन को दिशा दी। ब्रिटिश सरकार ने अंततः: उन्हें भी मद्रास में सितंबर 1932 मे गिरफ्तार कर लिया गया और नासिक जेल भेज दिया। नासिक जेल में उनकी मुलाकात अच्युत पटवर्धन, एम. आर. मसानी, अशोक मेहता, एम. एच. दांतवाला, और सी. के. नारायण स्वामी जैसे नेताओं से हुई। इन नेताओं के विचारों ने कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (सी.एस.पी) की नींव रखी। जब कांग्रेस ने 1934 मे चुनाव में हिस्सा लेने का फैसला किया तब कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी ने इसका विरोध किया। लोग नारायण साहब को आजाद भारत का गांधी मानते थे।
बताया जाता है कि आन्दोलन के समय उनका स्वास्थ्य बिगड़ना शुरू हो गया। अत: जयप्रकाश नारायण साहब का निधन 8 अक्टूबर, 1979 को पटना में मधुमेह और ह्रदय रोग के कारण हो गया। इस प्रकार नारायण साहब हमेशा के लिए सब को छोड़ कर चले गये