( asanas )
( asanas )

यूरिक एसिड की वजह से बढ़ गया है जोड़ों का दर्द तो राहत देंगे ये योगासन

नई दिल्ली। Yoga For Uric Acid: अगर आपको भी जोड़ों के दर्द के साथ उठने बैठने में परेशानी होती है या फिर उंगलियों में सूजन के साथ दर्द भी बना रहता है तो ये शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने का संकेत हो सकता है। आजकल शरीर में यूरिक एसिड (Uric Acid) का बढ़ना लोगों के बीच एक गंभीर समस्या बना हुआ है। जिसे कुछ खास योगासन करके कंट्रोल किया जा सकता है।

शरीर को चुस्त-दुरुस्त और मन को शांत रखने के लिए दुनियाभर में हर साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Day of Yoga) मनाया जाता है। ऐसे में इस खास मौके पर जानते हैं आखिर क्या है शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने के कारण और कैसे कुछ योगासन करके इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

क्यों होती है यूरिक एसिड की समस्या-
आम तौर पर हमारा शरीर किडनी की सहायता से यूरिक एसिड को फ़िल्टर करता है और मूत्र के साथ इसे शरीर से बाहर निकल देता है। यदि आप अपने भोजन में बहुत अधिक प्यूरिन का सेवन करते हैं, या यदि आपका शरीर इस यूरिक एसिड से काफी तेजी से छुटकारा पाने में असमर्थ है, शरीर में इसकी मात्रा बढ़ने लगती है और ब्लड में यूरिक एसिड का निर्माण होने लगता है। यदि यूरिक एसिड का लेवल बहुत बढ़ जाता है तो उस स्थिति को हाइपर्यूरिसीमिया के रूप में जाना जाता है। यूरिक एसिड के बढ़ने से शरीर की विभिन्न मांसपेशियों में सूजन आ जाती है, जिसके कारण दर्द होने लगता है और यह दर्द बढ़ने लगता है इससे गाउट नामक बीमारी हो सकती है जो दर्दनाक जोड़ों का कारण बनती है। यह ब्लड और मूत्र को भी एसिडिक बना सकता है।

See also  सर्दियों में सिर्फ स्किन नहीं बालों का भी रखें खास ख्याल

यूरिक एसिड के कारण-
-कुछ प्रकार के आहार के कारण शरीर में यूरिक एसिड इकट्ठा हो सकता है।
-कुछ मामलो में यह आनुवंशिक होता है।
-मोटापा या अधिक वजन होने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
-यदि आप बहुत अधिक तनावग्रस्त रहते हैं तो भी आपके शरीर में यूरिक एसिड इकट्ठा हो सकता है।
-कुछ स्वास्थ्य डिसऑर्डर भी यूरिक एसिड के बढ़ने का कारण बन सकते हैं।
-किडनी की बीमारी से यूरिक एसिड बढ़ सकता है।
-मधुमेह/डायबिटीज के कारण भी यूरिक एसिड बढ़ता है।
-सोरायसिस(जो एक त्वचा रोग होता है) के कारण यूरिक एसिड बढ़ सकता है।

करें ये योगासन-
-ताड़ासन (Mountain Pose)-
ताड़ासन करने के लिए पैरों के साथ लंबा खड़े हो जाएं। हाथों को ऊपर की तरफ सीधा रखें। पूरी गहरी सांस लें और अपने हाथों को ऊपर उठाएं। हथेलियां एक दूसरे के सामने हों और हाथ सीधे आसमान की ओर हों।

-वृक्षासन (Tree Pose)-
अपने दाहिने पैर को अपनी बाईं जांघ पर ऊपर की ओर रखें। पैर का तलवा सपाट होना चाहिए और मजबूती से रखा जाना चाहिए। अपने बाएं पैर को सीधा रखें और संतुलन पाएं। सांस भरते हुए हाथों को सिर के ऊपर उठाएं और हथेलियों को आपस में मिला लें। ध्यान रहे कि आपकी रीढ़ सीधी है और कुछ गहरी सांसें लें। धीरे-धीरे सांस छोड़ें और अपने हाथों को नीचे लाएं और अपने दाहिने पैर को छोड़ दें। दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं।

-अर्धमत्स्येन्द्रासन (Ardhamatsyendrasana)-
अर्धमत्स्येन्द्रासन करने के लिए सबसे पहले दंडासन में बैठ जायें। हल्का सा हाथों से जमीन को दबायें और सांस अंदर लेते हुए रीढ़ की हड्डी को लंबा करें। बाएं पैर को मोड़ें और दाएं घुटने के उपर से लाकर बाएं पैर को जमीन पर रखें। दाहिने पैर को मोड़ें और पैर को बाएं नितंब के निकट जमीन पर आराम से रखें। बाएं पैर के उपर से दाहिने हाथ को लायें और बाएं पैर के अंगूठे को पकड़ें। श्वास छोड़ते हुए धड़ को जितना संभव हो उतना मोड़ें और गर्दन को मोड़ें जिससे कि बाएं कंधे पर दृष्टि केंद्रित कर सकें। बाएं हाथ को जमीन पर टिका लें और सामान्य रूप से श्वास लें। 30-60 सेकेंड के लिए मुद्रा में रहें। आसन से बाहर निकलने के लिए सारे स्टेप्स को विपरीत क्रम में करें। यह सारे स्टेप्स फिर दूसरी तरफ भी दोहरायें।

See also  दुनियाभर में मनाया जा रहा है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, PM मोदी ने दिया संदेश...

धनुरासन (Dhanurasana)-
धनुरासन को करने के लिए अपने पेट के बल लेट जाएं, हाथों को धड़ के साथ, हथेलियां ऊपर उठाएं, और अपने पैरों को कूल्हे-चौड़ाई से अलग रखें। अब सांस अंदर लें और जोर से अपनी एड़ियों को अपने नितंबों से दूर उठाएं, अपने घुटनों को मोड़ें और अपनी टखनों को पकड़ें। पैरों को हिप-चौड़ाई की दूरी पर रखें। सीधे देखें और अपने चेहरे को तनाव मुक्त रखें। पेट को फर्श से दबाने से सांस लेने में दिक्कत होगी। अपने धड़ के पिछले हिस्से में अधिक सांस लें, और सुनिश्चित करें कि सांस रोकना नहीं है। लंबी और गहरी सांस लें और इस मुद्रा में 20-30 सेकंड तक रहें। सांस छोड़ते हुए मुद्रा को छोड़ दें और कुछ सांसों के लिए चुपचाप लेट जाएं।