Monday, December 6, 2021 at 5:23 AM

राजा शत्रुघ्न की नगरी में शान से निकली लंकेश की सवारी

मथुरा। राजा शत्रुघ्न की नगरी में मथुरा में विजय दशमी (दशहरा) पर लंकेश की सवारी शान से निकली। इससे पहले विधिविधान से रावण की पूजा अर्चना की गई। मथुरा दशहरा पर रावण के पूजन की यह परंपरा 25 साल से निभाई जा रही है। 25 साल पहले लंकेश भक्त मंडल ने इस परंपरा की शुरूआत की थी।
लंकेश भक्त मंडल कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर दशानन की पूजा, अर्चना और वंदना की। पहले से अधिक उत्साह से लबरेज भक्तों ने इस बार धूमधाम से लंकेश की शोभायात्रा निकाली। लंकेश के स्वरूप का यमुना तट स्थित प्राचीन शिव मंदिर में महादेव का विधि विधान से पंचामृत अभिषेक कर पूजन किया, भोग लगाया और आरती उतारी। उसके बाद में लंकेश वक्त मंडल के सदस्यों ने दशानन की आरती की। इस मौके पर रावण का अट्टहास लोगों को रोमांचित करता रहा।
त्रेता युग में भगवान श्रीराम का आदेश पाकर शत्रुघ्न मथुरा गए तथा लवणासुर से भयंकर युद्ध किया था। अंत में लवणासुर का वध हुआ। इसके पश्चात शत्रुघ्न मथुरा के राजा बने तथा वहां का राज सिंहासन संभाला। मथुरा में होलीगेट के पास आज भी रंगेश्वर गली में राज शत्रुघ्न का मंदिर है।
लंकेश भक्त मंडल के ओमवीर सारस्वत का मानना है कि हम हर साल राम की पूजा करते हैं तो रावण की क्यों नहीं। हर साल पुतला जलाने से क्या बुराई दूर हो जाती है। सारस्वत ब्राह्मण रावण को अपना वंशज मानते हैं। इससे पहले प्रतीकात्मक रूप से रावण के स्वरूप से भगवान भोलेनाथ की पूजा कराई जाती है, इसके बाद मंडल के सदस्य रावण के स्वरूप की पूजा करते हैं। यहां पर रावण का मंदिर निर्माण भी प्रस्तावित है। इस मंडल में करीब 50 सदस्य हैं।