बच्चे के साथ खेलना शेर को पड़ा महंगा !

शेर के पंजे में खुद के बच्चे को फंसा देखकर लकड़बग्घे बौखला गए और उसे बचाने के लिए शेर पर हमला बोल दिया. मगर बात तो कुछ और ही निकली. दरअसल शेर तो उस बच्चे के साथ खेल रहा था, जिसे लकड़बग्घे शिकार समझ बैठे थे. फिर क्या था शेर की शामत आ गई.
शेर ने किसी जानवर को अपने पंजों में जकड़ रखा हो तो इसके मायने समझना मुश्किल नहीं होता. अगले ही सेकेंड में उसके प्राण पखेरू उड़ जाएंगे और वो राजा साहब की भूख शांत कर रहा होगा. कई बार ऐसा नहीं भी होता है, लेकिन क्या करें हाथ में आए शिकार को शेर यूं ही जाने देगा ये कौन सोच सकता है. लकड़बग्गे भी इसी गलतफहमी का शिकार हो गए की उनका बच्चा जो शेर के पंजों में जा घिरा था वो अब नहीं बचेगा. यही सोचकर लकड़बग्घों ने शेर को चारों तरफ से घेर लिया.

शेर अपने पंजों और जबड़ों के बीच लकड़बग्घे के बच्चे को फंसाए बैठा था. वो न तो अपने जबड़ों से उसे फाड़ डालने को बेताब नज़र आ रहा था, न ही बच्चे को ख़रोंच पहुंचाई. तो आखिर शेर लकड़बग्घे के बच्चे के साथ करने क्या वाला था. हाथ में आए शिकार का वो इतना जतन क्यों कर रहा था. इन सवालों के जवाब तलाशना लकड़बग्घों के लिए आसान नहीं था.

हेयना का परिवार शेर के पंजे में खुद का बच्चा देख बेचैन हो रहे थे. इतने बेचैन की शेर की नियत को ठीक से भांप पाने की न उनमें क्षमता थी न समझ. उन्होंने झुंड बनाया और चारों तरफ से शेर को घेर लिया. इतना ही नहीं जहां कहीं भी शेर की प्रजाति का कोई नज़र आया ,उन्होंने सबको घेर लिया. इतनी भागमभाग मची की जंगल में हाहाकार मच गया. लेकिन हेयना का जो बच्चा बब्बर शेर के पंजे में था वो सबसे सुरक्षित था.

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दरअसल शेर बच्चे के साथ खेलना चाहता था. वो उसे छेड़ रहा था, अठखेलियां कर रहा था. कुछ देर तक तो बेचारा बच्चा भी शेर की नियत समझ नहीं पा रहा था इसीलिए जल्दी ही उसकी पकड़ से वो भागना चाहता था. मगर काफी देर तक जब शेर ने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया तो वो भी शांत हो गया और जंगल के राजा के साथ मस्ती की. हालांकी बच्चे की सुरक्षा से अनजान लकड़बग्घों ने जंगल में खूब हाहाकार मचाया. जहां भी शेर, बाघिन कोई भी नज़र आया वो उसे दूर तक दौड़ा लेते, उन पर हमला करते. यानि सही नियत के साथ बच्चे के साथ खेलना भी शेर राजा को महंगा ही पड़ा.