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कैसे हारेगा कोरोना?

नई दिल्ली।  केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच 'वैक्सीन पॉलिटिक्स' शुरू हो गई है। पहले महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने यह कहा कि राज्य में कोरोना टीके की भारी किल्लत है और जल्द ही आपूर्ति न हुई तो टीकाकरण रोकना पड़ेगा। तो वहीं, अब ओडिशा और राजस्थान ने भी केंद्र से मदद मांगी है। ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री ने जहां कहा है कि राज्य में अब सिर्फ अगले दो दिनों के लिए ही टीके का स्टॉक बचा है तो वहीं, राजस्थान में वेंटिलेटरों की किल्लत सामने आई है। 

ओडिशा के स्वास्थ्य मंंत्री नाबा किशोर ने कहा, 'अभी राज्य में 5.34 लाख खुराकें बची हैं। हम रोजाना 2.5 लाख वैक्सीन देते हैं, हमारे पास अगले दो दिनों का स्टॉक है। हमने केंद्र को इस बारे में चिट्ठी लिखी है और कहा है 10 दिन के लिए कम से कम 25 लाख खुराकें भेजे। केंद्र से वैक्सीन आना जरूरी है। अगर हमें दो दिनों के अंदर वैक्सीन नहीं मिलेगी तो हमें टीकाकरण रोकना पड़ेगा। हमारे 1400 में से 700 टीकाकरण केंद्र पहले ही बंद हो चुके हैं। हमें उम्मीद है कि जल्द ही टीके भेजे जाएंगे।'

राजस्थान को मिले खराब वेंटिलेटर!

राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य को 1000 वेंटिलेटर भेजे गए थे लेकिन इन्होंने दो-ढाई घंटे बाद ही काम करना बंद कर दिया। सीएम गहलोत ने समीक्षा बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाया था। केंद्र को इसकी जानकारी होनी चाहिए थी और हमने उन्हें सूचित कर भी दिया है। इसमें कोई राजनीति नहीं है, हम उन्हें तकनीकी खामी के बारे में बता रहे थे।

महाराष्ट्र में कई जगहों पर टीकाकरण रुका

मंगलवार को महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने राज्य में टीके की किल्लत होने का दावा किया था। उन्होंने कहा थी कि राज्य में सिर्फ 3 दिनों के लिए ही टीके का स्टॉक बचा है। दूसरी तरफ, एनसीपी नेता सुप्रिया सुले ने भी यह दावा किया कि पुणे के सौ से ज्यादा टीकाकरण केंद्र सिर्फ इसलिए बंद कर दिए गए हैं क्योंकि वहां टीके ही उपलब्ध नहीं हैं। महाराष्ट्र के सतारा में भी वैक्सीन की कमी के बाद टीकाकरण रोक दिया गया है।

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