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 तीन साल पहले मोदी सरकार ने बताई थी जनसंख्या बढ़ाने की ज़रूरत- जयराम रमेश

Jairam-Ramesh
 नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण नीति का प्रस्ताव लाए जाने के बाद देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा गर्म है। एक तरफ भाजपा देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत का पक्ष ले रही है तो दूसरी तरफ विपक्ष इस पर सवाल खड़े कर रहा है और इसे सांप्रदायिक एंगल देने की भी कोशिश कर रहा है। अब कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने दस्तावेज शेयर करते हुए कहा है कि 2019 में मोदी सरकार ने संसद में पेश अपने सर्वेक्षण में ही जनसंख्या बढ़ाने की जरूरत को सामने रखा था।

जयराम रमेश ने 2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण का एक हिस्सा ट्वीट करते हुए कहा कि मुझे संदेह है कि भाजपा में ज्यादातर लोग इस बुनियादी तथ्य से अवगत हैं। साझा किए गए दस्तावेज में लिखा गया है कि दक्षिणी राज्यों, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, प बंगाल और महाराष्ट्र में अब गर्भधारण प्रतिस्थापन दर काफी कम हो गई है। कुछ राज्य 2030 तक वृद्ध समाज की तरफ बढ़ रहे हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कुल गर्भ धारण दर प्रतिस्थापन दर से अधिक है लेकिन इसमें काफी कमी देखी गई है।

बता दें कि प्रतिस्थापन दर वह प्रजनन दर होती है जिसको पार करने के बाद युवाओं की संख्या बच्चों से अधिक हो जाती है। ऐसे में बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ने लगती है। रमेश ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘डेमोग्राफी में महत्वपूर्ण टिपिंग पॉइंट तब होता है जब प्रजनन क्षमता का प्रतिस्थापन स्तर 2.1 तक पहुंच जाता है। इसके एक या दो पीढ़ी के बाद, जनसंख्या या तो स्थिर हो जाती है या घटती है। ये सबसे पहले 1988 में केरल में हुआ, फिर 5 साल बाद TN में।’जयराम रमेश के साथ साथ कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। 

शशि थरूर ने कहा कि भाजपा एक समुदाय विशेष को निशाना बनाने के लिए जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे को उठा रही है। यह कोई संयोग नहीं है कि जिन उत्तर प्रदेश, असम और लक्षद्वीप में जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे को जोर शोर से उठाया जा रहा है, हर कोई जानता है कि भाजपा का इरादा किस ओर है। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदुत्ववादी ताकतों ने जनसंख्या को लेकर ठीक से जानकारी हासिल नहीं की है। 

उनका मकसद सिर्फ राजनीतिक और सांप्रदायिक है।कांग्रेस नेता शशि थरूर ने यह भी कहा कि अगले 20 वर्षों में भारत के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती यह होगी कि उसे बड़े स्तर पर बुजुर्ग आबादी होने की स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जनसंख्या वाली बहस पूरी तरह से गलत है क्योंकि ज्यादातर राज्यों ने प्रजनन की प्रतिस्थापन दर को हासिल कर लिया है।

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