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Saturday, October 16, 2021 at 1:33 AM

मंदिरों व पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े, माता की पूजा अर्चना की

पूर्णिया। नवरात्र की धूम अब चरम पर है। अष्टमी पर बुधवार को मंदिरों व पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े तथा माता की पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने अष्टमी पर व्रत रखकर माता की आराधना की। बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने माता की डाली भरी तथा भोग लगाया। अपने-अपने घरों में भी लोगों ने श्रद्धा भाव से माता की पूजा अर्चना की। गुरुवार को नवमी तिथि को माता का खोइछा भरा जाएगा तथा बिदाई दी जाएगी। इस अवसर पर श्रद्धालु कुमार कन्याओं को भी भोजन कराएंगे।

 

शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित देवी मंदिरों में माता की पूजा अर्चना की गई। मंगलवार की शाम पट खुलने के बाद से ही लोग प्रतिमा का दर्शन करने उमड़ने लगे थे। अष्टमी को शहर के दुर्गा बाड़ी, ठाकुरबाड़ी, पुलिस ठाकुरबाड़ी, रजनी चौक, कालीबाड़ी, मधुबनी, लाइनबाजार, जेल चौक आदि मंदिरों में लोगों की अधिक भीड़ उमड़ी। महिला श्रद्धालुओं ने माता महागौरी को साड़ी, श्रृंगार का सामान, नारियल, मिष्ठान्न आदि देकर डाली भरी तथा विशेष आराधना की। विदित हो कि कोसी-सीमांचल में महाअष्टमी को निर्जला व्रत रखने की परंपरा है। नवरात्र के अष्टमी का विेशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर माता का पूजा अर्चना करने से लोगों की मुरादें पूरी होती है।

 

पंडित आचार्य धर्मेद्र ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव को पाने के लिए कई वर्षों तक मां पर्वती ने कठोर तप किया था जिससे उसका रंग काला हो गया था। जब भगवान शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए तो उन्होंने गौर वर्ण प्रदान किया। इससे मां पार्वती महागौरी कहलाईं। मान्यता है कि दुर्गा अष्टमी को व्रत रखने और महागौरी की आराधना करने से सुख, सौभाग्य और समृद्धि मिलती है। यहां काफी संख्या में श्रद्धालु निर्जला व्रत रखकर माता की पूजा अर्चना करते हैं। मां का ये स्वरूप भक्तों को सिद्धि प्रदान करते हैं।

 

नवमी को मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष पूजा अर्चना होगी तथा माता को खोइछा भर कर उन्हें विदाई दी जाएगी। इस दिन कुमारी कन्याओं का पूजन करना बहुत शुभ माना गया है। विशेष रूप से देवी उपासना के इन पावन दिनों में किसी भी दिन कन्या पूजन कर पुण्य प्राप्त किया जा सकता है परंतु अष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं का पूजन करना और भी फलदाई माना गया है।

आचार्य धर्मेंद्र ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार सृष्टि सृजन में शक्ति रूपी नौ दुर्गा, व्यवस्थापक रूपी नौ ग्रह, त्रिविध तापों से मुक्ति दिलाकर चारों पुरुषार्थ दिलाने वाली नौ प्रकार की भक्ति ही संसार संचालन में प्रमुख भूमिका निभाती है। नवरात्रि में मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए हम उपवास, पूजा, अनुष्ठान आदि करते है जिससे जीवन में भय, विघ्न और शत्रुओं का नाश होकर सुख-समृद्धि आती है।

मान्यता है कि हवन, जप और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से प्रसन्न होती हैं। श्रद्धा भाव से की गई एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो कन्या की पूजा से भोग, तीन की से चारों पुरुषार्थ और राज्य सम्मान, चार और पांच की पूजा से बुद्धि-विद्या, छह की पूजा से कार्यसिद्धि, सात की पूजा से परमपद,आठ की पूजा से अष्टलक्ष्मी और नौ कन्याओं की पूजा से सभी प्रकार के ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इसलिए नवरात्र पर नौ कन्याओें की पूजा का विधान रखा गया है। नवमी को माता सिद्धिदात्री की पूजा के बाद माता की विदाई की जाएगी।