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Today's Paper

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तरुणमित्र के समूह संपादक हुए ब्रह्मलीन

तरुणमित्र के समूह संपादक हुए ब्रह्मलीन

• पत्रकारिता के एक युग का हुआ अंत

• 85 वर्षीय कैलाशनाथ जी ने 1978 में तरुणमित्र की जौनपुर नगर में रखी थी नींव

• पांच राज्यों से आज निकल रहा आठ संस्करण

 लखनऊ  दैनिक तरुण मित्र एवं उर्दू दैनिक जवां दोस्त कार्यालय में हुई एक शोकसभा में पत्र के समूह संपादक कैलाश नाथ विश्वकर्मा जी के अवसान पर शोक व्यक्त किया गया एवं उनकी आत्मा की शांति हेतु दो मिनट का मौन रखा गया। सदस्यों ने उनकी जुझारु एवं आदर्श मानदंडों वाली पत्रकारिता के रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हुए उनके साथ बिठाये गए संस्मरणों को याद किया। इस अवसर पर प्रबन्ध संपादक हरिमोहन विश्वकर्मा, अफरोज रिजवी, सुभाष पांडेय, हरजीत सिंह बाबा,राजेश मिश्रा, सी बी सिंह, रवि गुप्ता, नाजिया, शिवबली विश्वकर्मा, जसवंत विश्वकर्मा, विकास विश्वकर्मा, समीर भटनागर, चंद्रप्रकाश सिंह, अनिल यादव, ब्यूटी सिंह, रिनी राघवन, स्वीटी सिंह, सरिता कटियार, मुहम्मद जुनैद, अंकुल वर्मा, श्वेता वर्मा, साजिद खान, शिवांश, गुड़िया सिंह, सचिन सिंह, कैंसर रिजवी, अनिल सैनी, अमित श्रीवास्तव, यश त्रिवेदी आदि समस्त तरुण मित्र परिवार सदस्यों ने अपने प्रिय समूह संपादक को श्रद्धासुमन अर्पित किये।

जौनपुर/लखनऊ। दैनिक तरुण मित्र परिवार के मुखिया और संस्थापक, संघ के वरिष्ठ नेता और मशहूर शिक्षाविद व पत्रकार कैलाश नाथ विश्वकर्मा जी संक्षिप्त बीमारी के बाद रविवार को ब्रह्मलीन हो गए। सूचना प्राप्त होते ही तरुण मित्र मीडिया समूह में शोक की लहर दौड़ गई। कैलाशनाथ जी ने 85 वर्ष की आयु पूरी की और पिछले एक सप्ताह से वे सांस की तकलीफ से ग्रसित थे। उन्होंने जौनपुर के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली। उनके निधन का समाचार मिलते ही जौनपुर जिले में भी शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार घाट पर परिजनों व विशिष्ट जनों की उपस्थिति में कर दिया गया। जुझारु व संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी कैलाशनाथ जी बहुआयामी प्रतिभा के स्वामी थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके व्यक्तित्व की आभा इतनी उज्जवल थी कि क्षेत्र में कोई उसके निकट फटक भी न पाया। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने अपने समय के लोकप्रिय दैनिक गांडीव से जौनपुर में की। लम्बे समय तक पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने 8 अगस्त 1978 को स्वयं के समाचार पत्र तरुण मित्र की आधारशिला रखी और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज उनका लगाया गया तरुण मित्र का पौधा वट वृक्ष बन चुका है और इसके 5 राज्यों से 8 संस्करण प्रकाशित हो रहे हैं। सिद्धान्तप्रिय कैलाश जी ने सिर्फ पत्रकारिता तक स्वयं को सीमित नहीं रखा बल्कि सामाजिक सेवा के लिए भी खुद को समर्पित कर दिया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वे जिले के वरिष्ठतम पदाधिकारी थे और जिले में संघ के उन्नयन में उनका योगदान सर्वत्र सराहा गया। उन्होंने निर्धन व असहाय लोगों की मृत्यु के बाद उनके मृत शरीरों की दुर्दशा से द्रवित होकर उनके अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया और असहाय सेवा समिति की स्थापना की और आखिरी सांस तक निर्धनों व असहाय जनों के शवों को मृत्योपरान्त अंतिम संस्कार के उठाये गए बीड़े को पूरा करते रहे। जिले में शिक्षा के प्रति जागरूकता और उन्नयन हेतु उन्होंने भारतीय विद्या मंदिर की जौनपुर में स्थापना की और इसके माध्यम से आज हजारों बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जिले के पत्रकारों में उनका उच्चतम स्थान था और प्रेस क्लब के वे वर्षों तक अध्यक्ष रहे। आज की व्यवसायिक पत्रकारिता के विपरीत उन्होंने हमेशा आईने की तरह साफ़ और जुझारूता से सराबोर पत्रकारिता की और कभी भी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया, यही वजह है कि जिले ही नहीं प्रदेश में भी पत्रकारिता के पटल पर उनकी तूती बोलती थी। तरुण मित्र को सोपान दर सोपान उन्नति पथ पर ले जाने के लिए कभी उन्होंने समूह संपादक के रूप में कोई समझौता नहीं किया और न ही अपनी भावी संतति को इसके लिए प्रौत्साहित किया। पत्रकारिता के उच्च मानदंडों पर चलने वाले कैलाशनाथ जी को एक शिक्षाविद, समाजसेवी, पत्रकार के साथ जौनपुर अन्य अनेक संस्थाओं के संस्थापक, सहयोगी और समर्थक के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा। वे अपने पीछे 2 पुत्र व 4 पुत्रियां छोड़ गए हैं। अभी चन्द रोज पहले ही उनके एक दामाद कोरोना का शिकार बन गए थे और चन्द दिनों बाद ही उनका चले जाना उनके परिवारी जनों के लिए दुःखद घटना है, समूचे तरुण मित्र परिवार के साथ जौनपुर जिले के लिए अपूरणीय क्षति है। तरुण मित्र परिवार की एवं उर्दू दैनिक जवां दोस्त परिवार कीओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि समर्पित है और उनके द्वारा निर्मित किये गए आदर्शो व पत्रकारिता के मानदंडों पर चलते हुए हम सब उनकी सेवाओं के प्रति नतमस्तक हैं।

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