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Thursday, October 21, 2021 at 8:47 PM

चिकित्सकों ने विद्यार्थियों को बताये फाइलेरिया के लक्षण

बरेली। राजश्री  मेडिकल कॉलेज  के सभागार में मंगलवार को पाथ संस्था के सहयोग से फाइलेरिया पर सेमिनार का आयोजन किया गया।  सेमिनार में राजश्री मेडिकल कॉलेज और पाथ संस्था के चिकित्सकों के साथ ही मेडिकल के विद्यार्थियों ने  प्रतिभाग किया। मेडिकल कॉलेज  के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. डॉ. वी.के अग्रवाल  ने कहा कि फाइलेरिया बीमारी  क्यूलेक्स और मैनसोनाइडिस प्रजाति के मच्छरों से होती है। यह मच्छर जब किसी मानव को काटता है तो यह एक पतले धागे जैसा परजीवी मानव शरीर में छोड़ता है। मादा परजीवी, नर परजीवी के संपर्क में आकर लाखों सूक्ष्म फाइलेरिया नामक भ्रूणों को जन्म देती है।
यह माइक्रो फाइलेरिया रात के समय में प्रभावी होते हैं। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया बीमारी एक छिपा  हुआ दुश्मन है, क्योकि इसके लक्षण संक्रमण के  7-8 सालों बाद कई बार तो 10-12 सालों बाद नजर आते हैं। ऐसी स्थिति में मानव शरीर के अंगों हाथ, पैर, स्तन, अंडकोष में सूजन बढ़ने लगती है। प्रो. डॉ. जम्पाला श्रीनिवास माइक्रोबॉयलॉजी विभाग के सहायक ने क्यूलेक्स और मैनसोनाइडिस प्रजाति के मच्छरों के जीवन चक्र की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह बीमारी मच्छरों द्वारा फैलती है, खासकर परजीवी क्यूलेक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के जरिए।इंटरनल मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. डॉ.डब्लू .पी सिंह ने कहा  फाइलेरिया दुनिया की दूसरे नंबर की ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को दिव्यांग बना रही है। डॉ.  शोएब अनवार पाथ संस्था के सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर  ने कहा  जब तक किसी व्यक्ति के फाइलेरिया से पीड़ित होने का पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। दुर्भाग्य की बात यह भी है कि इस बीमारी का कोई कारगर इलाज नहीं है। इसकी रोकथाम ही इसका समाधान है।