Saturday, November 27, 2021 at 3:34 AM

सकारात्मक सामाजीकरण ज़रूरी है महिला हिंसा रोकने में: मधु कुशवाहा

प्रो. राजाराम शास्त्री सभागार, समाज कार्य विभाग, म.गां. काशी विद्यापीठ, वाराणसी में गुरुवार को एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें समाज में व्याप्त स्त्रियों एवं बालिकाओं के साथ होने वाली हिंसा एवं भेदभाव की समस्या पर प्रकाश डाला गया।कार्यक्रम की मुख्य वक्ता, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग की ‘फुल ब्राइट’ फैलोशिप प्राप्तकर्ता प्रो. मधु कुशवाहा थीं।
प्रो. मधु कुशवाहा ने बताया कि माइक्रो अग्रेसन के कारण समाज में महिलाओं के विरू़द्ध हिंसा ज्यादा हो रही है। इरादतन तथा गैर-इरादतन पुरूष महिलाओं पर भद्दी टिप्पणी करते हैं। महिला व्यवहार को नियंत्रित किया जाता है।महिलाओं को पुरूषों की तुलना में दिमागी रूप से कमजोर प्रदर्शित किया जाता है। महिलाओं के विरूद्ध लैंगिक चुटकुले गढ़े जाते हैं। महिला हिंसा को रोकना है तो किशोरो का सकारात्मक सामाजीकरण करना अति आवश्यक है।डॉ. शम्भूनाथ सिंह रिसर्च फाउण्डेशन की कार्यक्रम निदेशक डॉ. रोली सिंह ने बताया कि जन्म से लेकर कब्र तक महिलाओं के विरूद्ध हिंसा होती है। उन्होंने बाल विवाह की रोकथाम की समस्या की भयावहता एवं इसके रोकथाम में आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डाला।सेमिनार के समन्वयक, समाज कार्य विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. संजय ने लिंग-भेद विरोधी जेंडर प्रतिमानों के विश्लेषण एवं उनमें बदलाव के प्रयास हेतु युवाओं को अमंत्रित करते हुए सेमिनार की थीम के ऊपर प्रकाश डाला।कार्यक्रम की अध्यक्षता व अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. वन्दना सिन्हा ने संचालन सहायक आचार्य अनिल कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शैला परवीन ने किया। कार्यक्रम में प्रो. एम.एम. वर्मा, प्रो. भावना वर्मा, डॉ. बंशीधर पाण्डेय, डॉ. निमिषा गुप्ता, डॉ. अनिल कुमार चौधरी, डॉ. संदीप गिरि तथा विभाग के कर्मचारी सोमेश सिंह कठेरिया, नवीन श्रीवास्तव, गोविन्द, ऋषिकेश चौबे, मुन्ना, सुनील गुप्ता इत्यादि उपस्थित रहे।