Monday, December 6, 2021 at 2:33 AM

हरी सब्जियां व टमाटर प्याज की कालाबाजारी से चरमराई गरीबो की अर्थव्यवस्था

भाव समझ खरीददारी से कतराने लगे लोग
महंगाई की मार झेल रहा रोहतास
दुर्गेश किशोर तिवारी
सासाराम। त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन चुनाव 2021 के मद्देनजर रोहतास में कुल दस चरणों मे होना है। जिसमे तीन चरणों का चुनाव भयमुक्त वातावरण में शांति पूर्वक संपन्न हो गया तथा शेष सात चरण बाकी है। दशहरा का त्यौहार भी खत्म हो गया।आगामी दिनों में अन्य त्यौहार दीपावली, छठ आदि है। इस दरमियान कोविड 19 भी असरदार नही रहा।क्योकि जिस तरह पंचायत चुनावों में जनसम्पर्क का आगाज हो रहा है तथा दशहरा के त्योहार व खुले बाजारों में लोगो के आपाधापी के बीच भ्रमण करते रहे तथा वाहनों में भेड़बकरियो की तरह ठूस ठूस कर ज्ञातब्य स्थान पहुचते रहे आदि जैसे बने माहौल से कोरोना रोहतास में वेअसरदार होत नजर आया एवं कोरोना गाइडलाइन कागजो तक ही सिमटी नजर आई।

 

इस बीच कोरोनाकाल से लेकर 2021 के पंचायत चुनाव में हरी सब्जियों के भाव जो चढ़ा अबतक उतरने का नाम नही ले रहा है। सातवे आसमान को छू रही सब्जियां अब हर किसी के बलबूते से बाहर होता जा रहा है। नतीजतन गरीबों के थाली से न केवल हरी सब्जियां गायब होती जा रही है बल्कि टमाटर, प्याज मुराई आदि की सलाद भी अब नसीब होता नही दिख रहा। खाधान्न सामग्री सरसो तेल आदि भी लोगो को झकझोरने लगा है। इसका आर्थिक बोझ भले ही नौकरी पेशा करने वाले, नौकरशाहों, कर्मचारियों, बड़े कारोबारियों व पूंजीपतियों आदि पर न पड़े लेकिन रोज कमाने खाने वालों लोगो के अलावा मध्यमवर्गीय परिवारों पर ब्यपक असर पड़ते नजर आने लगा है।

 

हालांकि जिले के प्रशासनिक महकमा से लेकर शासन के बागडोर अपने हाथों में थामे लोग भी तेज होते हरी सब्जियों के दामों से पूरी तरह से वाकिब है। लेकिन करवाई करने या शिकंजा कसने के बजाय पूरी तरह मौन धारण कर तमाशाबीन बने नजर आ रहे है। क्योंकि इनको मोटी रकम के तौर पर सरकारी खैरात तो मिलते ही है। ऊपरी कमाई भी हो जाने से ये बेफिक्र है और सरकारी खैरात के अलावा नजराना जो इन्हें मिलते है। जिसके कारण इनके वजट पर भी कोई खास असर पड़ते नही दिखता।वही हरी सब्जियों को छोड़ गरीब, किसान मजदूरों की मुख्य सब्जी आलू प्याज की हालत बाजारों में ऐसी होती जा रही है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग भाव समझकर ही खरीददारी करने से कतराने लगे है।

 

जबकि अन्य सब्जियों में टमाटर की दामों से गरीब कोसो दूर भागने लगते है।इस समय सत्तापक्ष से लेकर विपक्षी सियासतदानों ने हरी सब्जियों समेत आलू प्याज के बढ़ते दामों एवं महंगाई पर नकेल कसने के लिए कोई हुंकार भर रहे है और न ही इस पर कोई लगाम लगाने के लिए ठोस करवाई की बात कही जा रही है। वही पंचायत चुनाव में खड़े प्रत्यासी विकास की बात कर रहे है।लेकिन गरीबो की थाली से दूर हो रहे हरि सब्जियों पर मौन साध लेते है। पूरे चुनाव जुमलेबाजी कर वोटरों को अपने पक्ष में रिझाने के लिए अनाप शनाप बोलकर प्रभावित व आकर्षित करते रहे। वही जिले के प्रशासनिक महकमा बढ़ते भ्रष्टाचार व बेलगाम होती सब्जियों की कालाबजारी पर लगाम कसने के बजाय आंख मूंद कर चुनाव कार्य मे अपनी ब्यस्तता दिखाती नजर आ रही।

 

जैसे इनके अधिकार क्षेत्र में यह सब आता ही नही।सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि इस समय हरी सब्जियों का उत्पादन कम होने से महंगे दामों पर खरीददारी कर बिक्री की जा रही है।जबकि आलू प्याज का भी यही हाल है। भंडारण करने वाले जमाखोर कमी बताकर दाम बढ़ाकर हमी लोग को दे रहे है तो उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दामों का बोझ तो झेलना ही पड़ेगा। थोक व स्थाई सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि स्थानीय प्रशासन का सब्जी पर कोई अंकुश नही होने की वजह से क्षेत्रीय किसान जो स्वयं हरी सब्जी उत्पादित करते है वह भी मंडी में सब्जी लाकर थोक व खुदरा सब्जी तेज भावों में बिक्री कर चले जाते है।

 

जबकि जमाखोर सब्जियों का भंडारण कर उच्चे कीमतों पर छोटे व्यवसायियों को देता है। उधर खरीददारों का कहना है कि सर्द के मौसम में कुछ हरी सब्जियां ब्यापक तौर पर उत्पादित होता है फिर भी बोदी, करैला, भिंडी, लौकी, फूल गोभी, पालक, बैगन आदि की कीमतें सर चढ़कर बोल रहा है।