Wednesday, December 8, 2021 at 3:46 PM

हिंदुओं में सामूहिकता का अभाव इसलिए प्रबल सिद्ध होते हैं मुस्लिम और ईसाई

मुरादाबाद: प्रवास के दूसरे दिन गोवर्धन मठ पुरी पीठ के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि हिंदुओं में सामूहिकता का अभाव है। यही वजह है कि मुस्लिम और ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों के सामने हिंदू निर्बल सिद्ध होते हैं। शंकराचार्य ने कहा कि सनातनी हिंदुओं की युवा पीढ़ी को इस बात पर ध्यान देना होगा। यदि पर्याप्त शक्ति चाहिए तो सामूहिकता को जीवन में उतारना होगा। समाज के लिए हर रोज कुछ घंटे का समय निकालना होगा। शंकराचार्य ने कहा कि मुस्लिम और ईसाई धर्म को मानने वाले आपस में तमाम मतभेदों के बाद भी सामूहिकता से जुड़े हैं।

मुरादाबाद के राजन एन्क्लेव में आयोजित कार्यक्रम में शंकराचार्य ने कहा कि जीवन जीविका के लिए नहीं है। बल्कि जीवन के लिए जीविका है। इसलिए मनुष्य जीवन का उपयोग केवल जीविका के पीछे दौड़ने में या भोग में न करे। क्योंकि सिर्फ भोग में जीवन को लगाने वाले व्यक्ति का जीवन पूरी तरह व्यर्थ सिद्ध होता है।

शंकराचार्य ने कहा कि पृथ्वी, पानी, प्रकाश और पवन ऊर्जा के 4 स्रोत हैं। लेकिन आज विश्व स्तर पर जिस प्रकार विकास को गलत तरीके से परिभाषित और क्रियान्वित किया जा रहा है, उससे ऊर्जा के चारों स्रोत अत्यंत कुपित और विकृत हो गए हैं। शंकराचार्य बोले- सृष्टि की संरचना का प्रयोजन समझे बिना और मानव जीवन की सार्थकता काे समझे बिना विकास को परिभाषित करना संभव नहीं है।