Thursday, September 23, 2021 at 6:13 AM

कॉलोनियों से पलायन कर रहे लोग, प्रशासन बोला नगर निगम जाने  

मथुरा। मथुरा वृंदावन मंे कॉलोनियों में बाढ का पानी घुस गया है। लेकिन मथुरा मंे यमुना नदी में बाढ का सच यह है कि यमुना रिहाइसी इलाकों में नहीं पहुंची है बल्कि जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते 250 से अधिक कॉलोनियां यमुना की गोद मंे बस गई हैं। यमुना खादर के पास जयसिंहपुरा क्षेत्र में तमोली के निकट बनी कालोनी में यमुना का पानी आ जाने से खलबली मच गई है। वहीं वृंदावन में पानीघाट, हुड़दंग नगर, यमुना विहार, कालिंदी नगर सहित पानी घाट क्षेत्र एवं कालीदह क्षेत्र में बनीं अवैध कालोनियों में यमुना का पानी घुस गया है।
बुधवार को यमुना का जल स्तर चेतावनी के निशान से नीचे थी। जिला प्रशासन का कहना है कि खतरे के निशान को अगर जल स्तर छूता है तो बाढ का खतरा बनेगा। बुधवार को यमुना का जल स्तर 164.98 मीटर था। मथुरा में यमुना का चेतावनी का निशान 165.20 मीटर और खतरे का निशान 166 मीटर पर है। एडीएम वित्त एवं राजस्व ब्रजेश कुमार का कहना है कि यमुना का जल स्तर खतरे के निशान पर पहुंता है तो बाढ के हालात बनेंगे। फिलहाल इस तर की संभावना नहीं दिख रही है।

उन्हांेने कहाकि आज की तारीख में बाढ का कोई खतरा नहीं है। यमुना खतरे के निशान से नीचे है। कॉलोनियों में पहुंचे बाढ के पानी पर उन्हांेने कहाकि अगर कहीं अवैध कालोनियों में कही यमुना का पानी भर है तो यह नगर निगम की जिम्मेदारी है, नगर निगम जल निकासी की व्यवस्था करे। दूसरी ओर मथुरा वृंदावन की दर्जनों कॉलोनियों में यमुना का पानी भर गया है। लाग छतों पर हैं और खाने पीने के सामन के लिए मौहताज हो गए हैं।  2016 में विकास प्राधिकरण ने जब तक आंख खोलकर देखा, तब तक 250 से अधिक अवैध कॉलोनियों में आलीशन भवन खड़े हो चुके थे। विप्रा का दायरा भी बढ़ा और साथ ही अवैध कॉलोनियों का आंकडा भी। ये सिलसिला अभी भी जारी है। अप्रैल 2016 में ऐसी 250 अवैध कॉलोनियों पर निशान भी लगाये गये थे।
विकास के बढ़ते दायरे और बढ़ती आबादी का सुनहरा मौका देख मथुरा में कॉलोनियों की कतारें खड़ी होती रहीं। प्लॉट पर अप्रूव्ड का बोर्ड लगाकर लोगों की आंखों में धूल झोंकी गई। एक के बाद एक अवैध कॉलोनियां बसतीं गईं और कॉलोनाइजर्स मोटी कमाई करते रहे। दलालों की जेब भारी होती चली गई। यमुना में 20 साल से अवैध कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। हाईकोर्ट ने 2003 में 137 लोगों को नोटिस जारी कर निर्माण ध्वस्तीकरण के आदेश दिये थे। साल 2017 तक 180 लोगों को नोटिस जारी किये गये थे। कार्रवाई में करीब 120 भवन ध्वस्त कर दिये गये। 2010 में एक बार फिर अदालत ने यमुना किनारे बनाए जा रहे अर्द्धचंद्राकार पुल के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनाई के बाद अवैध निर्माण को गिराने के आदेश जारी कर दिए। प्रशासन ने नोटिस चस्पा और पैमाइश करने तक की कार्रवाई को समेट दिया। 2013 में अदालत ने सख्ती दिखाते हुए जिला प्रशासन को अवैध अतिक्रमण हटाने के तीसरी बार आदेश दिए।
कुंभ मेला क्षेत्र में करीब छह करोड़ की लागत से बना ब्रह्मर्षि देवराह बाबा घाट  चारों ओर से यमुना के पानी में घिर गया है। इतना ही नहीं लगातार जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण अब यमुना का पानी रिहायशी इलाकों में भी प्रवेश कर गया है। जिसके चलते इन क्षेत्रों के निवासियों को अपने घरों से आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आसपास तटीय इलाकों में बसी अन्य कालोनियों के वाशिन्दों की धड़कन तेज और रातों की नींद उड़ने लगी है।

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