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गांव के समीप 100 वर्ष से अधिक पुराना बरगद का विशाल वृक्ष आज भी लोगों को हरियाली के साथ ऑक्सीजन दे रहा

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गांव के समीप 100 वर्ष से अधिक पुराना बरगद का विशाल वृक्ष आज भी लोगों को हरियाली के साथ ऑक्सीजन दे रहा है। लगभग 10 बिस्वा की परिधि में फैले इस वृक्ष को ग्रामीणों ने अपनी धरोहर समझ रखा है। इसके साथ ही हैरिटेज ट्री घोषित करने की मांग भी की है। वर्तमान में कोरोना महामारी का समय चल रहा है। जिसमें ऑक्सीजन की लोगों को बहुत जरूरत है। उसी की कमी से लोग अपनी जान भी गवां रहे है। लेकिन कैमा गांव के लोगों को ऑक्सीजन देने का काम पुराना बरगद का पेड़ कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पेड़ अंग्रेजी हुकूमत के आंदोलन का मूक गवाह है। जो पूरे इलाके के लोगों के लिए संजीवनी का काम कर रहा है। पुराने बरगद के पेड़ के आसपास स्थित दर्जनों घरों का वातावरण शुद्ध व शीतलता रहती है। बुजुर्गों के अनुसार पहले मुख्य तना नीम के पेड़ से निकला था। वह धीरे धीरे इतना विशालकाय हो गया कि नीम उसी में गुम हो गयी। पेड़ की छांव व हरियाली का आनन्द ले रहे लोगों को इस पेड़ से लगाव हो गया है।

बरगद के वृक्ष को लोग विरासत के रूप में संजोए हुए है। भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म में बरगद के पेड़ को महत्त्वपूर्ण बताया गया है। कई विशेष दिनों में बरगद की पूजा भी की जाती है। पेड़ से मिलने वाले फायदों के कारण ही इसे हिदुस्तान का राष्ट्रीय पेड़ कहा जाता है।दिनेश बडोला, रेंजर मुसाफिरखाना ने बताया कि 100 वर्ष से अधिक पुराने वृक्षों को सहेजने के लिए उनका चिन्हांकन किया जा रहा है।

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