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 पीपल की तरह बरगद के पेड़ का भी मानव जीवन में विशेष महत्व 

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हसनपुर। पीपल की तरह बरगद के पेड़ का भी मानव जीवन में विशेष महत्व है। बरगद का धार्मिक एवं औषधीय महत्व भी दूसरे पेड़ों से अधिक है। झम्मन लाल पीजी कालेज के वनस्पति विभाग के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार कहते हैं कि डायबटीज, डिप्रेशन, पित्त दोष जैसे गंभीर रोग दूर करने में बरगद बहुत उपयोगी होता है। बरगद को ग्रामीण क्षेत्र के लोग वट अथवा बड़ वृक्ष भी कहते हैं। बरगद के पेड़ की उम्र एवं छाया अधिक होने से पक्षियों का बसेरा भी अधिक रहता है। भगवान शिव के तुल्य माने जाने वाले वट का सावित्री के व्रत में भी विशेष महत्व है। महिलाएं इसकी पूजा करके अपने सुहाग के लिए मंगल कामना करती हैं। प्राचीन समय में मंदिर में एक बरगद का पेड़ होना निश्चित था। हसनपुर के गांव मंगरौला के शिव मंदिर में आज भी बरगद का एक प्राचीन पेड़ है। यह पीपल की तरह दिन रात आक्सीजन देता है। बरगद का पेड़ करीब 260 पौंड आक्सीजन हर साल देता है। गर्मी के मौसम में भरी दोपहरी ग्रामीण क्षेत्र के लोग जिन गांवों में बरगद के पेड़ हैं उनकी छाया में काटते हैं। लोगों का मानना है कि बरगद के पेड़ हमें विभिन्न गंभीर रोगों से छुटकारा दिलाने में मददगार हैं।

डॉ अजय कुमार बताते हैं बरगद का वानस्पतिक नाम फारकस बेगालेंसिस है। देश का राष्ट्रीय वृक्ष भी बरगद ही है। कोलकाता के बोटानिकल गार्डन में ग्रेट बरगद का वृक्ष करीब 250 साल पुराना और देश का सबसे बड़ा वृक्ष है। मानव जीवन में पेड़ों का विशेष महत्व है। इनमें पीपल व बरगद का धार्मिक एवं औषधीय महत्व भी कम नहीं है। मैं संकल्प लेती हूं कि पर्यावरणीय व जैव विविधता संरक्षण में सहायक बरगद का रोपण व संरक्षण करूंगी। राजकुमारी महंत, हसनपुर। बरगद हमारी आस्था से जुड़ा पेड़ होता है। इसका संरक्षण करना धार्मिक ²ष्टि से भी बहुत जरूरी है। सावित्री वृत के अवसर पर महिलाएं इसी वृक्ष की पूजा करती हैं। सावित्री वृत के दिन बरगद का पौधा रोपित करने का प्रयास करूंगी।

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