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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हकीकत देखी

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ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लाख दावे करें, लेकिन स्थिति इसके विपरीत ही है। मंगलवार को टीम ने जयसिंहपुर तहसील क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हकीकत देखी तो व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। सीएचसी पर जहां विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी देखने को मिली वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सा कर्मियों के अलावा अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को वहां की अव्यवस्था से दो चार होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा अव्यवस्था पीएचसी जासापारा व हयातनगर में देखने को मिली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची तो मेन गेट के पास स्वास्थ्य कर्मी कोविड परीक्षण करते मिले। चिकित्सा अधीक्षक डा. सुरेंद्र पटेल अपने कक्ष में रजिस्टर का अवलोकन करते दिखे। वहीं डा. सभाराम पाल ओपीडी में मरीजों का परीक्षण कर रहे थे। जानकारी करने पर पता चला कि संविदा व स्थाई मिलाकर कुल 47 स्वास्थ्य कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें अधीक्षक सहित तीन चिकित्सक, फार्मासिस्ट शामिल हैं। यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ, सर्जन, डेंटल सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है जिसकी वजह से क्षेत्र के लोगों को लंबी दूरी तय कर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिला मुख्यालय जाना पड़ता है।

पीएचसी हयातनगर पर डा. मानिकचंद गेट पर बैठे मिले। वार्ड ब्वाय श्रीनाथ अंदर बैठे थे, जबकि अस्पताल में एक भी मरीज नहीं मिला पूछने पर डाक्टर ने बताया कि सुबह से पेट संबंधित बीमारी के पांच मरीज दवा के लिए आए थे। यहां कुल पांच स्टाफ की तैनाती है। दो लोगों की टीकाकरण में ड्यूटी लगी है। पड़ताल में पता चला कि आवासीय भवन जर्जर है। पीने के पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है, वहीं शौचालय भी बदहाल है। इसके चलते यहां स्वास्थ्य कर्मी रात्रि विश्राम नहीं करते। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर व्यवस्था बदहाल दिखी। यहां स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बनाए गए आवासीय परिसर झाल झंखाड़ से घिरे मिले। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि आए दिन अस्पताल परिसर में सांप व जंगली जंतु निकलते रहते हैं जिससे भय बना रहता है। रात्रि विश्राम को छोड़िए दिन में बैठने से ही डर लगता है।

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