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वैश्विक महामारी के दूसरे लहर में आक्सीजन सिलेंडर की किल्लत होने पर 135 आक्सीजन सिलेंडर की खरीद की गई

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भदोही।  अनियमितता में लिपिक की निलंबित करने के बाद विभाग के अधिकारी फाइल को छिपाने लगे हैं। हकीकत यह है कि कोविड-19 में उपकरणों और सामग्री की खरीद के लिए अलग से अधिकारियों की टीम गठित की गई थी। इस कार्रवाई से जहां धांधली की पोल खुल गई तो वहीं अधिकारी खुद को बचाने में जुटे हुए हैं। वैश्विक महामारी के दूसरे लहर में आक्सीजन सिलेंडर की किल्लत होने पर 135 आक्सीजन सिलेंडर की खरीद की गई थी। इसमें एजेंसी द्वारा 91 सिलेंडर की आपूर्ति की गई थी लेकिन 44 अभी बकाया था। इसी बीच भुगतान को लेकर पेंच फंस गया। निदेशालय से मिले पत्र में सिलेंडर का दाम 54000 रुपये निर्धारित किया गया था। आशंका होने पर डीएम ने सीडीओ से इसकी जांच कराई। सीडीओ ने जैम पर निर्धारित दर 19,500 रुपये निर्धारित करते हुए रिपोर्ट भेज दी। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के संबंधित पटल के लिपिक प्रमोद मिश्रा को निलंबित करने की संस्तुति कर दी। निदेशालय ने उन्हें निलंबित भी कर दिया गया। इस कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमे में हलचल बढ़ गई तो सवाल भी उठने लगे। विभागीय सूत्रों का कहना है कि किसी भी सामग्री की खरीद में धांधली न हो इसलिए अधिकारियों की एक टीम गठित की गई थी।

टीम में अपर जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी आदि थे। निश्चित रूप से खरीद के लिए जो आर्डर दिए गए होंगे वह अधिकारियों की संस्तुति पर ही। बगैर उनके जानकारी से खरीद और दाम का निर्धारण कर लिया गया। यह बात किसी के गले से नीचे नहीं उतर रही है। बहरहाल मामले की जांच हुई तो अधिकारियों का भी बचना मुश्किल हो जाएगा। संबंधित लिपिक की ओर से पुराने दर पर ही निविदा कराने की फाइल टीम के सामने प्रस्तुत की जबकि शासनादेश यह है कि जैम पोर्टल पर निर्धारित दर से ही खरीद की जाए। यदि जैम पोर्टल पर दर नहीं जारी की गई थी तो इसकी जानकारी टीम को देनी चाहिए थी। सिलेंडर खरीद के लिए दो अलग-अलग फाइलें थीं। अब बचने के लिए वह भले ही एक ही फाइल बता रहे हैं।

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