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Today's Paper

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प्रवासी श्रमिकों को गंतव्य तक पहुंचाने का रेलवे की तरह उठाया भागीरथ बीड़ा

Bhagirath pioneered like a railway to take migrant workers to destination
ड्युटी के दौरान तत्कालीन एमडी हुए थे,कोरोना संक्रमित
अन्तर्राज्यीय बस सेवा बंद होने से चालक परिचालक होंगे प्रभावित
-रवि गुप्ता
लखनऊ। संकट के साथी को भूले योगी !  संकट की इस घड़ी में  जिस तरह से रातों दिन परिवहन निगम के साथियों ने प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य स्थलों तक पहुंचाने का कार्य किया है । वह वाकई में सराहनीय हैे तकरीबन 1 साल पहले कुछ ऐसे ही सराहनीय शब्द सूबे के मुखिया यानी सीएम योगी ने यूपी रोडवेज किस संपूर्ण टीम के लिए सार्वजनिक समारोह में व्यक्त किए थे। मगर अब जब कोरोना महामारी के इतने लंबे समय बीत गए तो तो योगी ने रोडवेज के उन्ही साथियों को लगता है भूल गए ।आज जब  कोविड-19  की दूसरी लहर ने देश प्रदेश में तब तबाही मचा रखी है विषम परिस्थिति  को ध्यान में रखते हुए केंद्र से लेकर राज्य सरकारों को आपात स्थितियों में अलग तरीके से लॉकडाउन लगाना पड़ रहा है। यहां तक की यूपी की बात करें तो कोरोना संक्रमण को देखते हुए रोडवेज की अंतर राज्य बस सेवाओं को बंद करना पड़ रहा,  जिससे निश्चित तौर पर  रोडवेज की आमदनी से लेकर बड़ी संख्या में निगम निगम में कार्यरत संविदा चालक परिचालक सहित तमाम रोडवेज कर्मी की आय का जरिया बंद हो सकता हैे । अब सवाल यह उठता है कि आखिर योगी इस वैश्विक महामारी के पहले चरण में रोडवेज कर्मियों की गई निस्वार्थ सेवा भावना को क्यों नजरअंदाज कर रहे हैें। गौर करने वाली बात है कि रोडवेज की अकेले लखनऊ रीजन में ही कार्यरत तमाम कर्मचारी और अधिकारी जान जोखिम में डालकर रात दिन बसों के संचालन में लगे हैें । हैरानी की बात यह है कि प्रदेश सरकार ने अभी तक रोडवेज कर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर तक घोषित नहीं किया हैे,   लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर  कतार बंद होकर खड़ी रोडवेज बसों को भुलाया नहीं जा सकता देश की अलग-अलग राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों को उनके गांव घर और दिल चित्र तक पहुंचाने का बीड़ा  उठाया है वह आज भी बदस्तूर जारी हैे इस बारे में जब कुछ रोडवेज चालकों व परिचालकों से बात की की गई तो उनका यही कहना रहा कहना रहा कि भले ही परिवहन साधन के मामले में रेलवे के बाद रोडवेज सेवा नंबर पर हो मगर यदि रेलवे ने प्रवासी मजदूरों को इतना स्थल तक स्थल तक छोड़ा तो तो रोडवेज की टीम ने उन्हें उनके गांव देश तक पहुंचाने का काम किया। यानी  महामारी के इस दौर में रेलवे के साथ रोडवेज ने भी कंधे से कंधा मिलाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।यूपी रोडवेज की इस टीम भावना  का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस समय के तत्कालीन प्रबंध निदेशक डॉ राजशेखर खुद अपने अधिकारियों के साथ चारबाग  रेलवे सकुर्लेटिंग एरिया से लेकर राजधानी के बस अड्डा पर जमीनी निरीक्षण करते देखे गए थे । ऐसे में वह खुद कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे  और कई दिनों तक एसजीपीजीआई में इलाज के बाद वह वापस ड्यूटी पर आप आए थे, रेलवे इस को ध्यान में रखते हुए जहां एक तरफ अपने कर्मियों को ड्यूटी के दौरान कोविड-19 के दौर में सुरक्षा व संरक्षण मुहैया करा रहा है तो दूसरी तरफ दिन प्रतिदिन रोडवेज कर्मियों पर अतिरिक्त कार्य का का भार थोपा जा रहा हैे । ध्यान देने वाली बात यह भी है कि यूपी रोडवेज में बड़ी संख्या में कार्य करने वाले संविदा कर्मियों एक पूरा समूह है परिवार पूरी तरह इसी पर निर्भर है ऐसे में इनकी रोजी रोटी कैसे चलेगीे  राजधानी के आलमबाग से लेकर चारबाग कैसरबाग और अवध बस स्टेशन की बात करें तो यहां के कई रोडवेज कर्मी कोरोना पॉजिटिव है। या फिर दूसरी बार संक्रमण की चपेट में आ गए हैें  इतना ही नहीं कई तो ड्यूटी करने के दौरान संक्रमित हुए और फिर परिस्थिति वश मुकम्मल इलाज ना मिलने से परलोक सिधार गए बावजूद इसके ना तो अभी तक योगी सरकार और ना ही यूपी रोडवेज के आला प्रबंधन का ध्यान इस ओर पड़ रहा है।
बाक्स:-रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधि रजनीश मिश्रा ने बताया कि मै खुद कोरोना संक्रमित होने के बीस दिन बाद जनता की सेवा में पुन:ड्युटी पर आया हूँ,और मंै सीएम से मांग करता हूँ कि संविदा रोडवेज चालक परिचालक कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर की श्रेणी में शामिल किया जाय, जिससे कर्मचारियों को इस संकट काल से उबारने की जरूरत है, यही मेरी सीएम से मांग है।

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