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 बरगद वृक्ष से हमें 20 घंटे से ज्यादा समय तक आक्सीजन मिलता...

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 चित्रकूट।  बरगद वृक्ष से हमें 20 घंटे से ज्यादा समय तक आक्सीजन मिलता है। सौ वर्ष से ज्यादा पुराना पेड़ 200 से 300 लीटर आक्सीजन रोज देता है जबकि नया पेड़ 100 लीटर आक्सीजन का प्रतिदिन देता है। बरगद के पेड़ की प्रत्येक पत्तियां आक्सीजन बनाती हैं। जिस पेड़ में जितनी ज्यादा पत्तियां होंगी वह उतनी ज्यादा आक्सीजन पैदा करेगा। इसके छांव में ज्यादा समय तक रहने से दैहिक, दैविक और भौतिक लाभ मिलता है। हमारे देश में पहले बड़े और लाभकारी पेड़ लगाए जाते थे जैसे नीम, बरगद, पीपल, आम, इमली व जामुन इत्यादि। इन पेड़ों से प्रकृति लाभ के साथ साथ लोगों को भी लाभ होता था। अब सड़कों के चौड़ीकरण के नाम पर इन पेड़ों को काट दिया जा रहा है और सड़कों के किनारे जंगली पौधे लगाए जा रहे हैं जिसके कारण पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। अभी भी गांव में बरगद की छांव में बीतते है दिन

शहरों में बरगद व पीपल लोगों को बहुत कम मिलते है लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी विशाल पेड़ों की मिलते है जिनकी छांव में लोग दिन बिताते हैं और चौपालें लगती है। बरातों को भी इन्हीं पेड़ों के नीचे जनवासा दिया जाता है। बरगद का पौधा लगाने का लिया संकल्प

'वट वृक्ष में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। बरगद की पूजा से तीनों देवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पर्यावरण को बचाने के लिए साल में कम से कम एक बरगद का पौधा जरूर लगाउंगीवट वृक्ष प्राचीन काल से ही पूजा जाता है। वट सावित्री पूजन के दिन सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखकर इस वृक्ष को जल चढ़ाती हैं। इस बार हम सब महिलाएं पार्क में बरगद का पौधा लगाएंगे।

छाया पहारिया, शंकर बाजार गंगा जी रोड कर्वी। वट वृक्ष पौराणिक काल से पवित्र माना गया है। आयुर्वेद में एक उत्तम औषधि है। छाल, पत्ते, जड़, फल का दवाई में प्रयोग होता है। साथ ही प्राण वायु देता है। वट सावित्री के दिन वट का पौधा जरूर लगाएंगी। दिव्या त्रिपाठी - डीआरआइ के पास चित्रकूट

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