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धर्म की विजय सदैव होती है- स्वामी मुक्तिनाथानन्द

धर्म की विजय सदैव होती है- स्वामी मुक्तिनाथानन्द
धर्म सबकी सदैव रक्षा करता है-स्वामी
लखनऊ। राजधानी में जारी सत्संग में मंगलवार की प्रात: कालीन सत् प्रसंग में रामकृष्ण मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानंद ने बताया कि सभी युगों मे धर्म की ही सदैव विजय होती है। हम देखते हैं महाभारत में कुरुक्षेत्र युद्ध के पहले जब दुर्योधन अपनी माता गांधारी के पास विजय का आशीर्वाद लेने आए थे। तब गांधारी ने अपने दुराचारी पुत्र को विजय तिलक पहनाने के परिवर्त में कहा- 'यतो धर्मस्ततो जय:' अर्थात जिनके पक्ष में धर्म रहेगा उनको ही आखिर में अवश्य विजय लाभ होगा। यही महाभारत तथा युग-युग मे सनातन भारत की अमर वाणी है। स्वामी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में भी कहते हैं कि यदि कभी धर्म की ग्लानि हो जाए और अधर्म का अभ्युत्थान हो तब ईश्वर स्वयं बारंबार नर रूप धारण करके जगत में अवतीर्ण होते हैं। धर्म का पुनरूत्थान करने के लिए, धर्म की ग्लानि हटा कर जो सदाचारी हैं उनका परित्राण तथा जो दुराचारी हैं उनका विनाश करते है। उन्होंने कहा कि जो धर्म का जीवन पालन करते हैं धर्म भी उनकी रक्षा करता हैं- 'धर्मो रक्षति रक्षित:' अतएव यदि हम लोग अपने- अपने जीवन में धर्म पालन करने के लिए सदा सचेष्ट रहेंगे। तब हम देखेंगे कि भगवत् कृपा से आखिर में हमारी विजय अवश्यंभावी है। धर्म को साथ रखते हुए हम ईश्वर के साथ भी रहेंगे एवं ईश्वर भी हम पर कृपा करके सर्व प्रकार विपद से उद्धार करेंगे एवं अन्त में अपना दर्शन देकर हमारा जीवन धन्य कर देंगे।

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