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वर्षा जल संचयन : जल संरक्षण जरूरी 
 

दो दशक पहले पानी की समस्या के दृष्टिगत शासन-प्रशासन द्वारा वर्षा जल संचयन के लिए विभिन्न नियम तय किए गए थे। 10 से 15 सालों में कई सरकारी भवनों का निर्माण हुआ है। इनमें छतों के पानी वर्षा जल संचयन के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं।

पानी को भूगर्भ तक पहुंचाने के लिए पाइप लाइन तथा टैंक भी बनाए गए हैं। इस कार्य पर हर भवन में लाखों रुपया खर्च हुआ। हालात यह है कि अनदेखी के चलते टैंक से उनका कनेक्शन नहीं हुआ है या फिर लीकेज के कारण बारिश का पानी यूं ही फैलता देखा जा सकता है।

खास बात यह है कि इस तरह की खामियां कुछ बजट में ही सही कराई जा सकती हैं, लेकिन जिम्मेदार इस मामले पर आंखें मूंद लेते हैं और बारिश का पानी बर्बाद हो जाता है। एक और बड़े-बड़े अधिकारी सरकारी आयोजनों में जल बचत तथा वर्षा जल संचयन को लेकर भाषण देते नजर आते हैं।

वहां उन्हीं के अधीन कार्यालयों तथा संस्थाओं में वर्षा जल संचयन के आधे-अधूरे इंतजाम उनकी मंशा पर सवाल खड़े करते हैं। सरकारी तंत्र ही इस मामले में संजीदा बने तो बारिश का पानी सहेजने में बड़ी सफलता मिलेगी।

इंजीनियर वीरेश गुप्ता बताते हैं कि सरकारी भवनों की छतों का क्षेत्रफल काफी अधिक रहता है। यहां वर्षा जल संचयन संयंत्र सक्रिय और प्रभावी बना रहे तो जल संरक्षण में सरकारी तंत्र का ही योगदान कम न होगा।

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