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Today's Paper

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लगातार गिर रहा है भूगर्भ जलस्तर 

सिंचाई के लिए किसानों की आत्मनिर्भरता बढ़ी है। वे बारिश, नहर और माइनर के भरोसे नहीं रहना चाहते। जो भी सक्षम में वे निजी नलकूप से सिचाई को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन जल संचयन की तरफ बहुत कम लोग ध्यान देते हैं। यही वजह है कि दोहन के मुकाबले संचयन कम होने से धरती की कोख खाली होती जा रही थी।

भूगर्भ जल विभाग ने जिले के ग्रामीण इलाकों में भूगर्भ जल की स्थिति पर नजर रखने के लिए 55 स्थानों पर यंत्र लगाए हैं, जो बारिश के मौसम से पहले और बाद की स्थिति बताते हैं। इन यंत्रों से मिली रिपोर्ट बताती है कि चार ब्लाकों में बारिश का पानी अन्य पांच ब्लाकों की तुलना में अधिक व्यर्थ बह रहा है।

हालात ये हैं कि 2015 और 2020 में बारिश के बाद अरांव ब्लाक का भूगर्भ जलस्तर 5.70 मीटर, फीरोजाबाद में 2.8, जसराना में 4.2 और नारखी में 4.1 मीटर की गिरावट दर्ज की गई। खैरगढ़, शिकोहाबाद और एका को छोड़ अन्य ब्लाकों की स्थिति चिंताजनक है।

एक तरफ तो बारिश कम हो रही है। इस कारण भूमिगत जल का दोहन बढ़ा है। ऐसे में भूगर्भ जलस्तर लगातार गिर रहा है। इस स्थिति से बचने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। अधिक से अधिक पेड़ लगाकर और वर्षा जल संचय करके स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।

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