Main

Today's Paper

Today's Paper

प्रकृति ही जीवन का आधार

प्रकृति ही जीवन का आधार

✍️ श्रीप्रकाश वर्मा
प्रकृति जीवन का आधार है और जल, जंगल, जमीन के बिना प्रकृति अधूरी है। प्राकृतिक संपदाओं के संरक्षण व संतुलित प्रयोग और विलुप्त होते जीव,जंतु व वनस्पति की रक्षा से ही हम एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
आज के इस दौर में मानव जहां विकास नित्य नए बुलंदियों के आयाम स्थापित कर रहा है। सुई से लेकर जहाज तक बनाने का सामर्थ्य रखने वाला इंसान आज एक वायरस की चपेट में आने से जिन्दगी की जंग को हारता जा रहा है। आज मानव जाति के अस्तित्व पर  कोरोना वायरस के कारण संकट के बादल छाए हुए हैं।
आज समझ में आ रहा है कि प्रकृति प्रदत्त इस मुफ़्त उपहार स्वरूप ऑक्सीजन की क़ीमत क्या है और कैसे इसके बगैर लोगों की सांसे टूटती जा रही हैं।
कहना गलत नही होगा कि हम इंसानों ने ही अपने स्वार्थ यानी विकास की खातिर न जाने कितने जंगलों, पेड़ों और पहाड़ों को काटकर जमींदोज़ कर दिया। चाहे विकास सड़कों का हो रहा हो या चाहे साज सज्जा में इस्तेमाल किए जाने वाले फर्नीचरों का, जमकर इन पेड़ों को काटा गया।
सोचिए आज ऑक्सिजन के बगैर लाखों जिन्दगियां दम तोड़ती जा रही हैं तो कहीं पानी की किल्लत इस कदर पड़ गई तो क्या होगा..???

हमारे कहने का उद्वेश्य बस इतना है कि आप प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेते हुए इसके द्वारा प्रदत्त औषधियों का सेवन कर, तन को तंदुरुस्त और मन को खुशहाल बनाएं। क्योंकि जब तक प्रकृति में संतुलन बना हैं तभी तक हम सुरक्षित है। मानव शरीर मशीन नहीं है जिसके कल - पुर्जो को बदल कर उसे पुर्नजीवित किया जा सके। आज ऑक्सिजन की किल्लत ने ये साबित कर दिया है इंसान कितना भी विकास कर ले लेकिन हवा और पानी नहीं बना सकता। विकास जब विनाश की ओर ले जाये तो इससे तौबा करना ही बेहतर है। इसलिए बेवजह की राजनीति को तज करके एक सच्चे हिंदुस्तानी का फ़र्ज़ निभाते हुए आपस में प्रेम और सद्भाव का माहौल कायम रखें। वैसे भी विदेशियों की गिद्ध जैसी निगाहें हमारे हिंदुस्तान पर टिकी हुई हैं कि किस तरह से आपस में लड़कर देश कमज़ोर हो और उनको राज करने का मौक़ा हासिल हो..!

Share this story