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शहर के निजी अस्पतालों में मरीजों के साथ लूट खसोट के मामले बढ़ते ही जा रहे

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कानपुर। शहर के निजी अस्पतालों में मरीजों के साथ लूट खसोट के मामले बढ़ते ही जा रहे है। तो वहीं बेबस मरीज इन्ही सब कारणों से सरकारी अस्पतालों की ओर रूख कर रहे है। वहीं जिला अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं होने होने से मरीज भटकने को मजबूर है।           

हरजेंदर नगर राजकुमार को पत्नी प्रेमवती ने न्यूरो की दिक्कत होने पर दो दिन पूर्व रामादेवी स्थित एक निजी हाँस्पिटल में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि दो दिन में यहाँ पर सांठ हजार रुपए ले लिए और मरीज के इलाज में लापरवाही बरती गयी। महिला ने बताया कि,जब उसने डाँक्टर से पति के इलाज को लेकर जानकारी तो उन्हें कुछ भी नहीं बताया गया। आरोप है कि,यहाँ पर स्थित मेडिकल स्टोर में उन्हें बाजार से कई गुना ज्यादा रेट पर दवाएँ खरीदनी पड़ी। पति को इलाज में कोई सुधार नहीं होने पर गुरुवार दोपहर परिजन मरीज  लेकर हैलट इमर्जेन्सी पहुंचे तो यहाँ डाँक्टर ने जांच के लिए भेजा।

नवाबगंज निवासी बुजुर्ग महिला सावित्री शुक्ला को उनके परिजन सुबह कार्डियोलाँजी लेकर पहुंचे वहाँ से बुजुर्ग महिला को हैलट रेफर किया गया। परिजनों ने बताया कि,बुजुर्ग महिला को न्यूरो की प्राब्लम बताई गयी।

जिला अस्पताल से लौटाया 

बांदा निवासी नरेंद्र कुमार को गले में संक्रमण होने के चलते वो बीते कुछ दिनों से खा-पी नहीं पा रहे है। पत्नी शगुनलता ने बताया कि,जिला अस्पताल में जब पहुंचे तो यहां सुविधा नहीं होने का हवाला देकर डाँक्टर ने पति को हैलट रेफर कर दिया। यहां पहुंचने पर इलाज शुरू किया गया। 

निजी अस्पताल से कराया डिस्चार्ज  

घाटमपुर निवासी बुजुर्ग रामराज को पेट और रीढ़ की हड्डी में शिकायत होने पर बेटे अनुज ने यशोदा नगर स्थित एक निजी हाँस्पिटल में भर्ती कराया। बेटे ने बताया कि,चार दिन भर्ती रहने के बाद भी यहां बुजुर्ग पिता को इलाज में कोई फायदा नहीं हुआ। यहां पैसा भी खूब लग गया। बताया कि,पिता को डिस्चार्ज कराने के बाद हैलट पहुंचे। यहां पिता की हालत देखने के बाद जेके कैंसर रेफर कर दिया गया।  

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